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Thursday, November 14, 2019

स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखाता आबकारी विभाग व शराब ठेकेदार

पेटलावद से अर्जुन ठाकुर  की रिपोर्ट

जुर्माने के बाद भी नहीं हो रहीं साफ-सफाई

पेटलावद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की धज्जिया स्वयं सरकारी नुमांईदों द्वारा उडाई जा रहीं है, गंदगी के ढेर से एक और मच्छरों का प्रकोप तो बड़ता हीं है साथ हीं इससे फेलने वाली बदबु से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। नगर के आबकारी विभाग कार्यालय तथा देशी व विदेशी शराब दुकान के परिसर में गंदगी का ढेर पड़ा है, लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा स्वच्छता के प्रति कोई सजगता नहीं दिखाई जा रहीं है। देशी व विदेश शराब पर मदिरापान करने वाले लोगो द्वारा खाली शराब की बोतले व कागज, पन्निया आदि इस परिसर में फेंक दी जाती है, जिस और न तो आबकारी विभाग के जिम्मेदार और ना हीं शराब ठेकेदार द्वारा इस और ध्यान दिया जा रहा है। वहीं इस परिसर में शराब ठेकेदार की लापरवाहीं से लोग खुले में शोच भी करते है, लेकिन स्वच्छता के प्रति इनका कोई ध्यान नहीं है, शराब दुकान परिसर में फैली गंदगी को लेकर नगर परिषद की टीम भी मौके पर पहुंची थी और परिसर में साफ सफाई रखने के निर्देश देते हुए ठेकेदार पर गंदगी करने को लेकर 500 रूपयें का जुर्माना भी लगाया गया किन्तु उसके बावजुद भी यहां गंदगी यथावत है, नगर परिषद द्वारा लगायें गयें जुर्मानें का कोई खासा प्रभाव ठेकेदार पर नहीं पड़ा है। वहीं आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी इस गंदगी की और कोई ध्यान नहीं दे रहे, जबकि जिम्मेदार अधिकारी पुरे दिन अपने ऑफिस में मोजुद रहते है। इस संबंध में आबकारी विभाग के श्री रावत से चर्चा की गई तो उन्होने कहां कि आपने बताया है, में दिखवाता हूॅ।
नाला भी हो गया चॉक....
इस परिसर के नजदिक एक नाला नगर परिषद द्वारा बनाया गया है, जो कि आज अपनी वास्तविक स्थित बयां करता हुआ घटिया निर्माण की पोल खोल रहा है, नाला बिच में से टुट गया है, जिस कारण नाला जाम हो गया है, इस नाले के जाम होने से गंदा पानी एक जगह एकत्रित हो रहा है, साथ हीं नाले में खाली शराब की बोतलों का ढेर लगा है, लेकिन अपने हीं परिसर से अधिकारी अन्जान बने है।   
एनजीओं लुट रहा वाहवाहीं
वर्तमान में स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर पेटलावद को नंबर 01 बनाने के लिए नगर परिषद एक एनजीओं के माध्यम से सफाई पर जोर दे रही है, लेकिन नगर के कई इलाको में पडे गंदगी के ढेर एनजीओं की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह खडे करती है, वर्तमान में एनजीओं अपने व्युवर्स बढ़ाने के लिए मात्र फोटो खिंचकर वाहवाहीं लुटने का काम रहा है। 

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