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Friday, November 29, 2019

स्कुली बसों मैं कई खामिया सरकार के नियमों की धज्जिया उडाते निजी स्कुल संस्थान

पेटलावद से राज मेड़ा की रिपोर्ट :-

पेटलावद  :- प्राचीनकाल  में भारतवर्ष शिक्षा दान की वस्तु माना जाता था, उसे आज धनाड्य व सम्पन्न लोगो ने व्यापार की वस्तु बना लिया है, शिक्षा का व्यापार और निजी करण शिक्षा के मानक स्तरों में भारी गिरावट ला रहा है। वहीं छात्रों के माता-पिता से स्कुल संचालकों द्वारा शिक्षा के नाम पर लुटपाट की जा रहीं है तो दुसरी और सरकारी मापदण्डों का ध्यान न रखते हुए नियमों की धज्जिया उडाई जा रहीं है जिसके कई जिते जागते उदाहरण पेटलावद क्षेत्र में संचालित निजी स्कुलों में देखे जा सकते है।
   पेटलावद क्षेत्र में सीबीएसई शिक्षा प्रणाली के नाम पर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध करवाने की बात पर पालकों से हजारों  रुपए की फिस वसुली जा रहीं है, किन्तु वास्तविक धरातल पर कुछ भी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते क्षेत्र के गरीबांे, किसानों और मध्यम वर्गिय पालकों का शोषण हो रहा है, जो कि अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा हेतू पैसा खर्च करते है पर नतिजे ंमें उन्हें वह सुविधाए और वह शिक्षा नहीं मिल पाती है।

यह है मापदण्ड़.....

सीबीएसई व अंग्रेजी माध्यम स्कुलों के लिए सरकार द्वारा मापदण्ड व दिशा निर्देश जारी कियें गयें है, लेकिन सरकार के मापदण्डों का खुला उलंघन किया जा रहा है। सरकारी मापदण्ड के अनुसार निजी स्कुलों में बच्चों के खेल कुद के लिए उचित खेल मेदान का हो
ना आवश्यक है, लेकिन नगर में संचालित हो रहे सीबीएसई स्कुलों में खेल मेदान का अभाव है। साथ हीं छात्रों के लिए होस्टल की व्यवस्था होना चाहिए लेकिन वह भी नहीं है, वहीं स्कुल बसों में सीसीटीवी केमरे होना अनिवार्य है किन्तु बसों में केमरे भी नहीं है साथ हीं नगर में बीएस 2 व बीएस 3 बसों को संचालन किया जा रहा है जो कि प्रदुर्षण फेला रहीं है, वहीं कुछ स्कुलों द्वारा पुरानी बसों के द्वारा बच्चों को घर से लाना व छोड़ा ने का  काम  करती है  वहीं कई स्कुल संचालक के पास तो बसे भी नहीं है, वे स्कूल  टेम्पों के माध्यम से बच्चों को लाया व छोड़ा जा रहा है। जानकारी के अनुसार स्कुल छात्राओं की सुविधा को देखते हुए बसों में महिला भी होना आवश्यक है, वही बसों में आपातकाल खिड़कियों का भी अभाव है, इस तरह से सरकारी दिशा निर्देशों की धज्जिया निजी स्कुलों के द्वारा उड़ाई जा रहीं है।   बसों के वाहन चालक लापरवाहीं पूर्वक वाहन चलाते है तथा बच्चों को स्कूल ले जाने वह लाने के लिए बस  बीच रोड़ पर ही बसें खड़ी कर दी जाती है, जिससे नगर का ट्रैफिक भी जाम होता है ऐसे में कभी भी बच्चों के साथ दुर्घटना भी घटित हो सकती है। वहीं बस ऑपरेटरों लिए नियम नियंत्रण नही है  ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियांे का भी  इस और ध्यान नहीं है।
इस संबंध में बीआरसी एसआर रायपूरिया से चर्चा की गई तो उन्होने कहां कि में मामले को दिखवाता हूॅ, गाड़ियों की जांच करवाई जाएगी और गलत पायें जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

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