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Monday, January 13, 2020

एमपीपीएससी परीक्षा में पुछे गयें प्रश्नों का विरोध.... आदिवासी भील जाति का अपमान निदंनिय... जयस की मांग, आयोग मांगे माफी....


पेटलावद से हरिश राठौड की रिपोर्ट

पेटलावद। मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा 2019 के प्रारंभिक परीक्षा में भील जनजाति के संबंध में दुष्चित्रण कर मान सम्मान को ठेस पहुंचाए जाने संबंधी गद्यांश कुल 5 प्रश्नों को निरस्त कर आयोग द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए इसको लेकर सोमवार को जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) के तहसील अध्यक्ष रोशनसिंह सिंगार व उपाध्यक्ष मुकेश गुंडिया के नेतृत्व में जयस कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे जहां उन्होने महामहिम राज्यपाल महोदय व मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रभारी तहसीलदार जितेन्द्र अलावा को सौंपा। जयस ने ज्ञापन सोंपते हुए मांग है कि म.प्र. लोक सेवा आयोग द्वारा प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन दिनांक 12 जनवरी को किया गया, आयोग द्वारा द्वितीय सत्र 2ः15 बजे से 4ः15 तक सी-सेट का प्रश्नपत्र संपन्न हुआ, जिसमें द्वितीय पेपर में भील अनुसूचित जनजाति के स्थिति के संबंध में गलत बात दुर्भावना वंश बताई गई जिससे भील समाज के मान सम्मान को गहरा आघात लगा है। 
   ज्ञापन में जयस के द्वारा बताया गया कि आयोग द्वारा जो ’’भीलवधूमल रूपी पत्थर से बंधी शराब के अथाह सागर में डूबती जा रही जनजाति है भील की अपराधिक प्रवृत्ति का भी एक प्रमुख कारण यह है कि सामान्य से अपनी देनदारिया पूरी नहीं कर पाते हैं फलतः धन उपार्जन की आशा में गैर वैधानिक तथा अनैतिक कामों में भी संलिप्त हो जाते हैं ’’ इस उल्लेखित गद्यांश में भील अनुसूचित जनजाति के संबंध में जो चित्रण किया गया है वह पूर्वाग्रह व द्वेषभावना से ग्रसित प्रतीत होता है। इस प्रकार का दुष्चित्रण भील जनजाति के मान-सम्मान व गरिमा के पूर्णतया खिलाफ है। इस तरह से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 का सीधा उल्लंघन किया गया है। वहीं सांस्कृतिक विविधता में एकता का प्रतीक इस राज्य की गरिमा व संविधान की मूल भावना पंथ रिपेक्ष के खिलाफ है, जबकि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक संस्था द्वारा इस प्रकार का कृत्य करना निंदनीय है तथा इस कृत्य का सभी आदिवासी समुदाय पुरजोर विरोध करता है। ज्ञापन में मांग करते हुए बताया कि परीक्षार्थियों के उज्जवल भविष्य व कठिन परिश्रम को ध्यान में रखते हुए परीक्षा से संबंधित कुल 5 प्रश्नों को भी निरस्त किया जाए तथा शेष अंक का पूर्णांक में निर्धारित किया जावे और म.प्र. लोक सेवा आयोग द्वारा कियें गयें इस कृत्य के लिए वह लिखित रूप से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। ज्ञापन देते समय गोपाल कटारा, विजय गामड़, वरसिंग मीणा, अनिल निनामा, पारसिंह बारिया, विकास बारिया, भेरूलाल बारिया, तेजमल सोलंकी आदि उपस्थित थें। 
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