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Tuesday, January 14, 2020

माँ भद्रकाली के दरबार में हुआ प्रख्यात साहित्यकार डॉ रामशंकर चंचल की ताजा कृति "काव्यधारा" का विमोचन

पेटलावद से हरिश राठौड की रिपोर्ट

पेटलावद (म.प्र)।  झाबुआ जिले के प्रख्यात राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार डॉ राम शंकर चंचल ने पेटलावद के पावन पवित्र आध्यात्मिक तीर्थ स्थान मां भद्रकाली के दरबार में 14 जनवरी को प्रातः 11:00 बजे अपनी ताज़ा कृति "काव्यधारा" का विमोचन किया इस अवसर पर उनका परिवार भी साथ था। विमोचन करते हुए  डॉ चंचल ने मां भद्रकाली के चरणों में कृति भेंट कर देश, समाज के सुख, सुकून और खुशहाली की प्रार्थना की।
डॉ चंचल का राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित अपनी कविताओं का यह महाकाव्य है "काव्य धारा"। जिसमें देश के अनेकानेक प्रांतों में प्रकाशित श्रेष्ठ साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में रचनाओं का अद्भुत कालजयी संग्रह है। जो डॉ चंचल की अथक साधना श्रम और तप को दर्शाता है। डॉ रामशंकर चंचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर झाबुआ जिले को पहचान दिलाई है। भारत के कक्षा 6 से बी.ए.-एम.ए. के पाठ्यक्रमों तक डॉ चंचल की कविताएं आज विद्यार्थी पढ़ रहे हैं वहीं विश्व के अनेकानेक देशों में भी आप की कविताएं हिंदी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। अपनी कृति का विमोचन करते हुए डॉ चंचल ने कहा कि मेरी मां की जन्मस्थली  यहीं है (रायपुरिया) । यही वजह है कि बचपन से मां भद्रकाली के प्रति मेरी गहरी आस्था रही। आज मैं जो कुछ हूं राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मां भद्रकाली का आशीर्वाद है , मैं बहुत प्रसन्न हूं की मेरी 51 वीं कृति का विमोचन मां के दरबार में मां के चरणों में रखकर सौभाग्य प्राप्त कर रहा हूं।


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