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Monday, January 6, 2020

छात्रावास अधिक्षक करता बच्चों पर अत्याचार.... अधिकारियों की मेहरबानी से बच्चों का भविष्य अंधकार में.....बच्चों ने लगायें अधिक्षक पर कई गंभीर आरोप...

पेटलावद से ओपी मालवीय की रिपोर्ट

पेटलावद। सरकार की मंशा है कि हर बच्चा शिक्षित हो और वह अपने व परिवार का नाम रोशन करें, गरीब छात्रों के लिए शासन द्वारा छात्रावास संचालित कियें जा रहे है जहां बच्चें रहकर पढ़ाई करते है, लेकिन क्षेत्र में सरकारी छात्रावासों की स्थिति दयनिय है, शासन द्वारा लाखों करोड़ों रूपयें इन छात्रावासों में खर्च कियें जाते है, जिससे कि यहां रहने वालें बच्चों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हो लेकिन जिम्मेदार अधिकारी व छात्रावास अधिक्षकों की मिलीभगत से छात्रों का भविष्य अंधकार की और जा रहा है। सरकार द्वारा बच्चों को हर वो सुविधा दी तो जा रहीं है, लेकिन इन छात्रावासोें में कुडंली मारकर बैठे भ्रष्ट छात्रावास अधिक्षक अपने अधिकारियों के आर्शिवाद से बच्चों के हक का निवाला छिनकर अपना पेट पालने में लगे है। मामला पेटलावद तहसील की ग्राम पंचायत मठमठ का है, जहां 50 सीटर शासकीय अजजा बालक छात्रावास के लगभग 45 छात्र इन दिनांे खासी परेशानियों का सामना कर रहे है, लेकिन उनकी सुध आज तक किसी ने नहीं ली। बच्चें यहां भुखे रहने को मजबुर है तो छात्रावास अधिक्षक बच्चों के नाम पर आने वाले राशन को बेचकर अपने जेबे भरने में लगा है। मुख्यालय के अंतिम छोर में स्थित इस छात्रावास की स्थिती काफी दयनिय है, छात्रावास अधिक्षक खुलेआम बच्चों पर अत्याचार करते है। खास बात यह है कि पुरे मामले की जानकारी अधिकारियों के संज्ञान में होने के बाद भी कोई कार्रवाई होती है।

बच्चों ने सुनाई अपनी पिढ़ा.....

इस छात्रावास में रहने वालों छात्र बादु अमलियार, प्रेमसिंग गामड़, मंगलसिंह वसुनिया, आकाश डामर, आकाश मुणिया, अर्जुन गरवाल, अजय भूरिया, किसन वसुनिया, सोनु डामर, अर्जुन डामर, लोकेश मैड़ा, निरंजन डामर, दिलीप वसुनिया, सुखदेव भूरिया, प्रविण वसुनिया आदि ने रोते हुए अपनी पिढ़ा बताते हुए कहां कि हमें समय पर भोजन नहीं दिया जाता है, छात्रवास अधिक्षक रमेश मैड़ा यहां के गेहू बेचकर अपना काम निकाल लेते है, दो समय भोजन मिलता है वह भी सिर्फ दाल हीं दी जाती है, कभी छात्रावास में हरी सब्जी नहीं बनी है। खीर पुड़ी खाली 15 अगस्त और 26 जनवरी को नसीब होती है। यहां रहने वाले बच्चें बताते है कि अच्छे खाने के बारे मंे हम छात्रावास अधिक्षक को बोलते है तो हमारे साथ मारपीट की जाती है तथा हमारें घर वालो को झुठी शिकायत की जाती है कि आपका बच्चा पढ़ता नहीं है इसे यहां से निकाल देंगे, जिस कारण मजबुरन हमें यहां नर्क की जिन्दगी जिना पड़ रही है। इसके साथ हीं फटे गद्दो पर छात्र सोते है 4 वर्षो से यहां नयें गद्दे नहीं लायें गयें है जबकि शासन द्वारा नयें गद्दे व अन्य सामग्री के लिए प्रतिवर्ष राशि आवंटीत की जाती है, लेकिन उस राशि की बिच में हीं बंटरबांट कर ली जाती है। यहां तक छात्रावास में रखी टेबले भी टुट चुकी है। बच्चों ने बताया कि इन समस्याओं को लेकर हमने पेटलावद बीईआंे साहब को भी अवगत करवाया था जिस पर बीईओं साहब यहां आकर भी गयें लेकिन हमारी समस्याआंे का निराकरण आज तक नहीं किया।

छात्रावास अधीक्षक करता बच्चों से मारपीट......

छात्रावास में रहने वाले छात्रों ने रोते हुए बताया कि जब भी हम अपनी समस्याओं को लेकर छात्रावास अधिक्षक को बोलते है तो हमारें साथ मारपीट की जाती है तथा अन्य तरह से प्रताड़ित किया जाता है, यहां तक छात्रावास अधिक्षक अपनी पत्नि को यहां लेकर आते है और उनके माध्यम से भी हमें डराया धमकाया जाता है, जिस कारण हम मजबुर होकर यहां रह रहे है, क्योंकि हमें पढ़ाई करके कुछ बनना है। नाम न छापने की शर्त पर यहां के ग्रामीणों ने भी बताया कि हमारे सामने कई बार छात्रावास अधिक्षक ने बच्चों को रोड़ पर लाकर पीटा है, इस बारे में हमने अधिक्षक को रोकना चाहा लेकिन उन्होने अपनी पत्नि को आगे कर दिया और कहां कि यह हमारा मामला है कोई इसमें बोलेगा तो झुठे केस में अंदर करवा दुंगी। एैसा नहीं की यह मामला जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में नहीं है, पुरे मामले की जानकारी अधिकारियों को होने के बाद भी छात्रावास अधिक्षक पर मेहरबानी करना बड़ी सेटींग की और ईशारा करती है।

खुले तार, दुर्घटना का अंदेशा.....

छात्रावास अधिक्षक की लापरवाहीं के चलते बच्चों की जान को भी खतरा है, सुबह शाम बच्चें यहां खेलते है, ऐसे में इस परिसर मंे खुले विघुत के तारो से दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है, बच्चों ने बताया कि इन तारों को लेकर भी हमने भी अधिक्षक से कई बार कहां लेकिन हमारी नहीं सुनी गई, कभी भी इन खुले तारों के कारण दुर्घटना घट सकती है, जिसकी पुरी जवाबदारी छात्रावास अधिक्षक की रहेेगी। अधिक्षक की लापरवाहीं यहां आसमान छुं रहीं है, कई बार बच्चों द्वारा लिखित में शिकायत करके जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आर्कषित करवाया लेकिन उनकी सुध आज तक किसी ने ली।
अंगुठा लगाकर निकाल ली जाती है, राशि.....

शासन गरीब आदिवासी छात्रों को हर वह सुविधा प्रदान करना चाहती है जिससे की शासन की योजनाओं का लाभ ले और पढ़ाई करके अपना व जिले का नाम रोशन करें। यहां तक छात्रों के खातो में राशि भी डाली जाती है। बच्चों ने बताया कि छात्रावास अधिक्षक रमेश मैड़ा द्वारा जबरजस्ती हमसे थंब मशिन पर अंगुठा लगवाकर  हमारें खातो की राशि निकाल लेते है, यहां भी विरोध करने पर हमें छात्रावास से निकाल देने की धमकी दी जाती है। छात्रावास अधिक्षक के अत्याचार से बच्चें यहां काफी परेशान हो रहे है।

कभी-कभी आते है अधिक्षक.....


बच्चों ने बताया कि छात्रावास अधिक्षक रमेश मैड़ा कभी-कभी छात्रावास में आते है तथा यहां आने के बाद हमें प्रताड़ित किया जाकर मारपीट की जाती है और यहा रखे गेंहू को बेचकर अपना काम निकाल लेते है। अधिक्षक ग्राम रामगढ़ में हीं निवास करते है, रात में हम यहां वार्डन के भरोसे रहते है। यहां तक छात्रावास में लाईट की भी समस्या है जिस कारण रात्री में हम बेठकर पढ़ाई तक नहीं कर सकते है। इन दिनों ठण्ड का मौसम होने के कारण हमें ठण्डे पानी से नहाना पड़ता है,गर्म पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, रात्री में मच्छरों का भी प्रकोप रहता है। यहां तक नहाने के लिए साबन नहीं दियें जाते, तेल, कपड़े धोने के सामान आदि का भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता है, जिस कारण हमें खासा परेशान परेशान होना पड़ रहा है। बच्चों ने एक स्वर में मांग करते हुए कहां कि हमें एैसा अधिक्षक नहीं चाहिए जो यहां कभी रहता भी न हो और हमारी हिस्से की राशि हड़पता हों।
इस मामले में बीईओं गुप्ता पेटलावद से चर्चा की गई तो उन्होने कहा कि मैने मामले को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है, वहाँ से कुछ कार्यवाही होगी।
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