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Saturday, January 4, 2020

खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए किसानों ने एसडीएम को सोंपा ज्ञापन.......एसडीएम ने कृषी अधिकारी को जारी किया पत्र....खाद वितरण में गड़बड़ी होने पर कृषी अधिकारी की होगी जवाबदारी.....


पेटलावद से राज मेड़ा की रिपोर्ट

पेटलावद। युरिया खाद के लिए चारों और हाहाकर मचा हुआ है, किसानों को काफी जद्ोजहद करने के बाद भी दो बोरी खाद नसीब नहीं हो रहे है, ऐसे में क्षेत्र के किसानों में काफी आक्रोश है। समय पर किसानों को खाद नहीं मिलने से उनकी फसले भी प्रभावित हो रहीं है। कडाके की ठण्ड में सुबह से हीं किसान युरिया के लिए लम्बी-लम्बी लाईने लगाकर खाद का इंतजार करते है, इन लम्बी लाईनों में महिलाए भी खाद के लिए परेशान होती रहती है। शनिवार को भी पेटलावद में खाद को लेकर किसानों ने हंगामा किया और अनुविभागीय अधिकारी को एक ज्ञापन सोंपकर खाद की कालाबाजारी रोकने व समय पर किसानों को खाद उपलब्ध करवाने की मांग की। जिस पर अनुविभागीय अधिकारी एमएल मालवीय ने एक पत्र जारी करते हुए वरिष्ठ कृषी विस्तार अधिकारी कृषी विभाग पेटलावद को निर्देशित किया की विकासखंड पेटलावद में सरकारी समितियों द्वारा यूरिया खाद का वितरण किया जा रहा है जिसमें अनियमितता होकर कृषकों द्वारा ज्ञापन एवं चक्का जाम कर कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो रही है । विकासखंड में यूरिया खाद का कृषकों को समुचित वितरण कराना आप की जवाबदारी है किंतु आपके द्वारा कोई भी कार्य नहीं किया जाकर कर्तव्य का पालन नहीं किया जा रहा है, जिस कारण आप व्यवस्था सुनिश्चित करें कि जिस ग्राम का कृषक जिस सोसाइटी से जुड़ा है उसे उसी सोसाइटी से 2 बोरी यूरिया आधार कार्ड के साथ खाते की ऋण पुस्तिका या खसरा नकल के आधार पर ही खाद दिया जाए तथा अधीनस्थ समस्त ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की लिखित में उनके क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सोसाइटी में उक्त व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु लिखित में ड्यूटी लगाकर आदेश की प्रतिलिपि कार्यालय को भेजे। यूरिया खाद के वितरण में गड़बड़ी होने या कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने पर आपकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। 
       कृषी अधिकारियों का कहना है कि इस बार अधिक वर्षा के कारण किसानों द्वारा गेहू की अधिक बोई गई है, जिससे रकबे में बढोत्तरी है, प्रतिवर्ष झाबुआ जिले का युरिया खाद का कोटा 100 मेट्रीक टन होता था परन्तु वर्तमान में अच्छी वर्षा होने से यह रकबा बढ़ने से 275 मेट्रीक टन की मांग शासन को भेजी थी जिसमें से वर्तमान में 200 मेट्रीक टन युरिया हीं उपलब्ध हो पाया, शेष युरिया अगले हप्ते तक आने की संभावना है, इसके पश्चात किसी भी किसान को युरिया खाद की कमी नहीं  आएगी

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