Breaking

Monday, January 6, 2020

साहब....केरोसिन डालने वालों पर हो हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज.... पिड़ित ने रो-रोकर सुनाई अपनी आप बिती.....

साहब....केरोसिन डालने वालों पर हो हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज....
पिड़ित ने रो-रोकर सुनाई अपनी आप बिती.....
चालाक, चतुर पटवारी ने लगाई अग्रीम जमानत की अर्जी....



पेटलावद से हरिश राठौड की रिपोर्ट

पेटलावद। सालांे से विवाह के समय वधु पक्ष से दहेज की मांग करने वाले लालची परिवार  की कई बड़ी कहानिया वर्षो से देखने सुनने को मिल रहीं है और दहेज न देने के खातीर कई नव विवाहितो की डोली तक नहीं उठ पाई, यहां तक की कई पिड़िताओं को अपनी जान से हाथ तक धोना पड़ रहा है। दहेज लेने देने को लेकर कानून में समय समय पर कई प्रकार के बदलाव कियें गयें यहां तक कई दहेज के लालची परिवारों को कानून मे आजिवन कारावास की सजा सुनाई गई है, आज देश की कुल आबादी में युवाओं का सबसे अधिक प्रतिशत होकर आधुनिक भारत के युवा 21वीं सदी में नयें भारत की संरचना करने की और अग्रसर है और ऐसी परिस्थिती में नव युवको की और से दहेज की मांग करना अपने आपमें बड़ा सामाजिक अभिशाप होकर हम आज भी पुरानी रूढी वादी सोच को लेकर जी रहे है।

यह है पुरा मामला....

ऐसा हीं एक मामला शनिवार-रविवार को देखने को मिला है जहां जामली क्षेत्र की एक नवविवाहित पढ़ी लिखी महिला कविता परिवर्तित नाम  के साथ राजस्व विभाग के उंचे पदो पर बैठे हुए सरकारी कर्मचारी और पढ़े लिखे परिवार ने महिला को जिंदा जलाने की कोशिष की गई लेकिन पुलिस के द्वारा मामुली धाराओं में अपराध दर्ज कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।
उल्लेखनिय है कि शनिवार रात्री को नगर के कानवन मार्ग की गली में रहने वाले ईश्वरलाल पाटीदार पटवारी व उसके परिवार के सदस्यों के द्वारा अपनी हीं पुत्र वधु को केरोसिन डालकर जिंदा जलाने की कोशिष की गई। पिड़ीता की रिपोर्ट पर पुलिस पेटलावद के द्वारा चार आरोपियों के खिलाफ अपराध तो पंजिबद्ध कर लिया लेकिन पुलिस की निष्पक्ष जांच पर खुद पिडीता द्वारा सवालिया निशान खडे कर दिये गयें है।

हत्या हत्या के प्रयास का हो मामला दर्ज.....

 के प्रयास का हो मामला दर्ज.....

स्नातक पढी लिखी पिड़िता के पेटलावद न्यायालय में आज सोमवार को धारा 164 के तहत बयान बंद कमरे में लेख बद्ध कियें गयें। मिडिया के सामने रो-रोकर अपनी आप बिती बताते है कहां कि पुरे परिवार के द्वारा मेरे उपर केरोसिन डालकर जलाने की कोशिष की गई यदि में समय रहते माचिस की तिली को जलाने वाले अपने सास, ससुर को धक्का देकर वहां से नहीं भागती तो शायद में आज जिवित नहीं रहती, पुरी केरोसिन से भीगी हुई पिड़िता को लेकर पुलिस खुद घटना स्थल से थाने पर लेकर आई और पिड़िता का मेडिकल करवाया। पिड़िता का कहना है कि पुलिस के द्वारा आरोपियों के खिलाफ यदि में मर जाती तो हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाता लेकिन मौत के मुंह से बाहर निकल कर आई हूॅ पुरे परिवार के द्वारा मुझे जान से मारने की कोशिष की गई है, आरोपियों के खिलाफ पुलिस को हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज करना हीं चाहिए।

आरोपी ने लगाई अग्रीम जमानत की अर्जी....

इधर पिड़िता के द्वारा मौत के मुंह से निकलकर आने की बात कहीं जा रहीं तो पिड़िता के परिजनों के द्वारा यहां तक कहां जा रहा है कि यदि हमारी पुत्री जलकर मर जाती तो अभी तक उसकी राख भी ठण्डी न होती लेकिन पुलिस आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजायें हल्की धाराओं में केस बनाकर मामले को रफा दफा करने में बैठी है, पुलिस की जांच प्रक्रिया पर इसलिए भी सवालिया निशान उठ रहे है कि शनिवार को दर्ज रिपोर्ट पर चालाक और चतुर ईश्वर पटवारी की और से सोमवार को न्यायालय में अग्रीम जमानत की अर्जी तक लग गई है, इस तरह से पुलिस इनको गिरप्तार न कर अंद्धरूनी तोर पर आरोपियों की सीधी मदद कर रहीं है।

न्यायालय की गाईड लाईन अनुसार हो जांच....

इस संबंध में विधि विशेषज्ञो की माने तो दहेज एवं हत्या जैसे संगीन मामलो की जांच के लिए सर्वोच्य न्यायालय के द्वारा पुलिस को गाईड लाईन जारी कर रखी है और पुलिस को इसी गाईड लाईन के अनुसार कार्य करना चाहिए लेकिन अब तक जो कार्रवाई पुलिस के द्वारा की जा रहीं है इससे इन निर्देशों का पालन होता दिखाई नहीं देता है जो कि स्थानिय पुलिस की भूमिका पर संदेह पेदा कर रहा है।
महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अत्याचार व हिंसा को लेकर न सिर्फ राज्य व केन्द्र सरकारें निष्पक्ष भाव से कार्रवाई करने के लिए शासन प्रशासन को निर्देशित करती है बल्की इन पिछले कुछ वर्षो में तो महिलाओं के प्रति बढ़ रहीं हिंसा को लेकर देश की सर्वोच्य न्यायालय तक ने भी शासन प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने के लिए कई बार तल्ख टिप्पणियों के माध्यम से आगाह किया है, लेकिन महिलाओं के प्रति बढ़ रहीं हिंसाओं के प्रति सख्त रेवेया अपनाने के बजायें प्रशासन सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने में विश्वास रखता है और जहां देश में महिला सुरक्षा के प्रति सतर्कता के भाव देखने को मिल रहे है, लेकिन आदिवासी अंचल में आज भी महिलाओं को अपने साथ हुई हिंसा व प्रताड़ना के लिए सख्त कार्रवाई करने के लिए प्र्रशासन का मुंह देखना पड़ता है।

----------------//////////

समाचार एवं विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें
🤳राज मेड़ा  7049735636
हरिश राठौड़ :- 99816 05033

Post a Comment

Post Top Ad