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Thursday, February 13, 2020

बोहरा समाज की महिलाओं ने लगाया प्रेरणादायक प्रदर्शनी शिविर बच्चों में देशभक्ति, स्वच्छता व संस्कार देता है बोहरा समाज



थांदला से ईमरान खान की रिपोर्ट
थान्दला। बोहरा समाज की महिलाओं के द्वारा महिलाओं के लिये प्रेरणा प्रदर्शनी शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें बोहरा समाज कीं वर्तमान और भावी पीढ़ी को धर्मोन्मुख, रोजगारोन्मुख, प्रामाणिक, सुसंस्कृत और सुशिक्षित करने के लिये विविध प्रयोग किये जा रहे हैं। सैयदना साहेब के आदेश पर आमिल शेख अलीहुसेन खेड़ीवाला के मार्गदर्शन बोहरा समाज की महिलाओं द्वारा बोहरा मस्जिद में प्रदर्शनी लगाई। बोहरा समाज की महिलाएं प्रदर्शनी के चित्रों आदि को अभिनय और संवादों के माध्यम से अपने धर्म गुरु के उपदेशों और कुरान ए शरीफ की हदीसों की व्याख्या करती जा रही थीं। मस्जिद में विभिन्न केबिन में कुछ महिलाएँ क्रोशिया से ऊन और धागों की मनमोहक और उपयोगी सामग्री बना रही थी। उन्होंने बताया कि यह सामग्री बाहर भेजी जाती है, इससे प्राप्त राशि से जरुरतमंद लोगों की मदद की जाती है। इसके पीछे धर्म गुरु का उद्देश्य है कि हर हाथ के पास काम हो, कोई दिमाग खाली न हो क्योंकि खाली हाथ और खाली दिमाग उपद्रव की जड़ है। 
     बोहरा समाज द्वारा अनूठी योजना के अन्तर्गत महिलाओं को गर्भधारण से लगाकर तीन वर्ष तक के बच्चे के मुख्य कार्यकलाप मां को डायरी में लिखना रहते है जिसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक उपदेश, सिद्धांत और संस्कारों के अनुसार ही बच्चे की परवरिश हो और वह इस डायरी में फोटो सहित रहे। एक तरह से यह समाज के बच्चों के आधार कार्ड हैं। ये डायरियां आमिल साहब के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है, जो सभी के लिये अनिवार्य है, जिससे समाज की हर माँ अपने कर्तव्य के प्रति सजग रहेगी और बच्चों का तारीख सहित प्रामाणिक लेखा सुरक्षित होता जाएगा वही किशोरावस्था में जीवनसाथी के चयन के लिये नेकी ईमानदारी की शिक्षा दी जाती है। बोहरा समाज द्वारा स्वच्छता पर विशेष कार्य किये जाते रहे है। मस्जिद में ही साफ सुथरे गार्डन और मधुमक्खी के माध्यम से सफाई, बुरी आदतों और शराब, सिगरेट आदि की हानियाँ और सफाई के महत्व को समझाया गया था। सैयदना साहब की देश को स्वच्छता का संदेश देने की भावना को बालिकाओं ने प्ले, पोस्टर, अभिनय और संवाद के माध्यम से बखूबी समझाया।
एक जगह प्ले के माध्यम से
गासिप और चुगली को धर्म सिद्धान्तों के खिलाफ बताया गया वही फोटो और संवाद के माध्यम से दो पानी की बूंदों का इतिहास बताया गया। एक बूंद सागर की सैर करती है तो दूसरी सीप में जाकर मोती बन जाती है। महिलाओं के इस अनूठे कार्यक्रम का उद्देश्य ऊर्दू में लिखा था जिसका तजुर्मा हिंदी और गुजराती भाषा में बहुत मधुरता और अदब के साथ युवा लड़कियां बखूबीकर रहीं थी। नयी पीढ़ी शिक्षा के साथ चरित्रवान बने, कर्मठ बनें, धर्म के प्रति समर्पित हो, प्रामाणिक होऔर राष्ट्र भक्त हों यह उद्देश्य लेकर चलने वाले धर्म गुरु बडे़ मौलाना साहेब की आध्यात्मिक उर्वरा शक्ति से यह शांतिप्रिय, देशभक्त समाज धन और धर्म दोनों की दृष्टि से समृद्धि वान बनें और राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग देते रहें। इस कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य डॉ जया पाठक, हिमालय पब्लिक स्कूल हेड योगिता शर्मा, श्रीमती गायत्री महेश गिरी, मेट्रो एकेडमी श्रीमती जसप्रीत कौर आदि ने बोहरा समाज की प्रदर्शनी देखते हुए महिलाओं के कार्यों की सराहना की।

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