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Wednesday, February 12, 2020

अमरगढ़ में स्थित करोड़ों की बेषकिमती भूमि को न्यायालय ने किया सरकारी सिद्ध.... सभी रजिस्ट्रीया की निरस्त... कलेक्टर झाबुआ के पक्ष में आया बड़ा फैसला....

पेटलावाद से हरिश राठौड की रिपोर्ट

पेटलावद। पेटलावद अपर जिला न्यायाधीश जेसी राठौर के न्यायालय से शासन जिला कलेक्टर झाबुआ के पक्ष में एक निर्णय आया है जिसमें न्यायालय के द्वारा शासन के पक्ष में निर्णय लेते हुए ग्राम अमरगढ़ में स्थित करोड़ों रूपयें की मुल्यवान भूमि पर वर्ष 2010 में कि गई रजिस्ट्रीयों को शुन्य घोषित कर दिया गया है। 

क्या है मामला.....

म.प्र.शासन की और से जिला कलेक्टर झाबुआ के द्वारा वादी के रूप में एक सिवील वाद वर्ष 2011 में अपर जिला न्यायाधीश के न्यायालय में प्रस्तुत करते हुए न्यायालय को बताया था कि ग्राम अमरगढ़ प.ह.न. 2 में स्थित भूमि सर्वे नंबर 123, 124, 135, 136 पे.की. रकबा 6.0 हैक्टेयर की भूमि जो कि वर्ष 1929-30 एवं वर्ष 1959-60 के राजस्व अभिलेख में शासकीय भूमि रहीं होकर उपरोक्त भूमि को प्रतिवादी नोसेरू पिता खुशरू भरूजा पारसी निवासी मुम्बई के वंशज एवं पिता फरामेंराज को जिनिंग फ्रेक्ट्री के व्यवसाय हेतू व्यवसायीक प्रयोजन से शासकीय लिज सशर्त शासकीय प्रक्रिया के अनुसार आवंटीत की गई थी और उपरोक्त भूमि को फरामेंराज एवं उसके परिजनों के द्वारा राजस्व रेकार्ड में 1987-88 में बतोर भूमि स्वामी रेकार्ड में दर्ज करते हुए भूमि पर अपना स्वामित्व एवं अधिकार मानते हुए वर्ष 2010 में दिनांक 19/02/2010 को उपरोक्त भूमि की फर्जी रजिस्ट्री जितेन्द्र पिता परमांद भावसार, अब्बुल सलिम पिता हाजिउद्नि मोहम्मद शेख, शुभाषचन्द्र पिता चंपालाल मांडोत, चन्द्रप्रकाश पिता सुजानमल पटवा, हितेन्द्र पिता मांगीलाल कुलंबी पाटीदार, रविशंकर पिता मोहनलाल त्रिपाठी, रूपा पति गोपाल भावसार समस्त निवासी बामनिया व अमरगढ़ को विक्रय करते हुए रजिस्ट्री संपादीत कर दी गई थी उपरोक्त रजिस्ट्रीयों को निरस्त करने और भूमि शासकीय होने की घोषणा म.प्र. शासन से अनुमती लेकर कलेक्टर के द्वारा न्यायालय में वाद प्रस्तूत किया था जिसमें प्रभारी अधिकारी के रूप में तहसीलदार पेटलावद उपस्थित होते रहे है, इस मामले में न्यायालय के द्वारा सिवील वाद प्रकरण क्रमांक 25/ए/2011, नविन वाद क्रमांक 02/ए/2017 में दिनांक 27/01/2020 को निर्णय करते हुए उपरोक्त समस्त रजिस्ट्रीयों को शुन्य घोषित करते हुए न्यायालय के द्वारा भूमि को शासकीय भूमि घोषित करने का निर्णय पारीत किया है। 

कौन-कौन होंगे प्रभावित....

इस मामले में शासन की और से नोसेरू पारसी सहित समस्त क्रेताओं के साथ हीं साथ तत्कालिन सरपंच ग्राम पंचायत अमरगढ़ व तत्कालिन रजिस्ट्रार मुकेश पिता रणजितसिंह बघेल को भी पक्षकार बनाया गया था जिसमें न्यायालय के द्वारा उभय पक्षों की दो साल तक पुरी सुनवाई व साक्ष्य आदि लेने के बाद फेसला शासन के पक्ष में दिया गया है। 

यू हुआ मामला उजागर....

दिनांक 14/07/1979 में पट्टेदार फरामेंराज की मृत्यु हो जाने पर दिनाबाई पति रूस्तम पारसी का नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज किया गया और उपरोक्त भूमि के संबंध में तहसीलदार पेटलावद के द्वारा भु-राजस्व की बकाया वसुली के लिए प्रकरण क्रमांक 26/बी/16 / वर्ष 1983-84 में बकाया वसुली का प्रकरण दर्ज करते हुए वसुली की प्रक्रिया प्रारंभ की गई और इसी दरमियान पुरा घोटाला राजस्व अभिलेख में तत्कालिन अधिकारियों के सामने उभरकर आया और तत्कालिन प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा उक्त भूमि को कुर्क करते हुए भूमि का आधिपत्य ग्राम पंचायत अमरगढ़ को सोंपा गया और तब से हीं उक्त भूमि का ग्राम पंचायत अमरगढ़ रिसिवर आधिपत्यधारी के रूप में कब्जेदार है, इसके पश्चात एक सिवील वाद पूर्व में प्रतिवादी की और से व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 2 पेटलावद के समक्ष वर्ष 1985 में प्रस्तुत किया था जिसमें न्यायालय के द्वारा दिनांक 30/09/1999 को पारीत  आदेश को नोसेरू आदि के द्वारा अपील नहीं करने से यथावत मानते हुए उपरोक्त आदेश शासन के पक्ष में जारी करते हुए 2010 में कि गई रजिस्ट्रीयों को शुन्यवत घोषित कर दिया। 

और भी है ऐसे मामले.....

न्यायालय में प्रकरण विचाराधिन होने के बाद भी भु माफियाओं ने दंबगई दिखाते हुए उक्त भूमि पर फर्जीवाड़ा करते हुए नकली दस्तावेज बनायें और करोड़ो रूपयें के व्यारे न्यारे कियें। इस गोरख धंधे में राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत थी, जिसके कारण भु माफिया ने लिज की जमीन का मालिक बनकर करोड़ो रूप कुट लिये। साथ हीं अमरगढ़ के अलावा देखा जाए तो पेटलावद, रायपूरिया, बामनिया में भी ऐसी कई सरकारी भूमिया है जो कि लिज के नाम पर तत्कालिन अधिकारियों से सांठ गाठ करते हुए भुमाफियाओं ने नाम पर दर्ज कराकर करोड़ो रूपयें कमायें और सरकार सहित आम जनता को नुकसान पहुंचाया। इस संबंध में नगर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि इस प्रकार के समस्त लिज की भूमियों की निष्पक्ष जांच होना चाहिए और जिम्मेदार लोगो के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होना चाहिए।

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