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Tuesday, February 18, 2020

पुलिस की करोड़ों की जमिन पर भाजपा के रसुखदारों का कब्जा.... पुलिस कब्जा छुड़ाने के मुड़ में नहीं... कब करोगें कमलनाथजी इन बडे भुमाफियाओं पर कार्रवाई....



पेटलावद से ओपीमालवीय / अनिल मुथा की रिपोर्ट..

प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने लगभग 2 माह पूर्व पुरे प्रदेश में भुमाफिया और अवैध अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ एक साथ मुहिम चलाई थी और इस मुहिम में प्रदेश के कई रसुखदारों के खिलाफ पुलिस व प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कई बड़ी-बड़ी बिल्डिंगो को जमिदोंज किया और कई सरकारी भूमियों को अतिक्रमण से मुक्त कराकर जनहित में उक्त भूमियों को अपने कब्जें में लिया लेकिन पेटलावद का स्थानीय प्रशासन और पुलिस इस मामले में कोई बड़ी या ठोस कार्रवाई आज तक नहीं कर पाया जबकि पेटलावद क्षेत्र में सबसे अधिक अवैध अतिक्रमण और भूमाफियाओं के कब्जें में सरकारी भूमिया निकली है। एैसा हीं एक मामला लगभग 1 माह पूर्व पेटलावद की जनता के सामने आया था जब पुलिस थाना पेटलावद की और से थाना मद की जमिन का सीमांकन के लिए तहसीलदार पेटलावद को आवेदन दिया था। तहसीलदार पेटलावद के निर्देश पर 6 सदसीय राजस्व निरिक्षक व पटवारियों का दल गठीत करके राजस्व रेकार्ड में पुलिस थाना मद के नाम से दर्ज सर्वे नंबर 1946 और 1949 का सीमांकन 20 जनवरी 2019 को किया गया।

सीमांकन से उजागर हुआ भारी भरकम अवैध कब्जा....

सीमांकन पंचनामें के अनुसार सर्वे नंबर 1949 में नेमकुमार पिता हमिरमल बरबेटा का पक्का मकान एवं गोडाउन बना हुआ पाया गया एवं इसी भूमि पर पक्का सी.सी. रोड़ भी मौके पर पाया गया, इसी के अलावा इसी सर्वे नंबर में लगभग 108 वर्गमीटर पर नेमकुमार बरबेटा के द्वारा संचालित की जा रहीं प्रायवेट कंपनी का बना हुआ पक्का भवन एवं 0.04 हैक्टेयर की भूमि पर नितेष कुमार बरबेटा एवं मनोज कुमार बरबेटा का अवैध कब्जा मौके पर पाया गया। इस तरह से शासन के द्वारा पुलिस थाने को दी गई जमिन के बडे भुभाग पर उक्त रसुखदार / भुमाफियाओं का मौके पर कब्जा पाया गया।
कब मिलेगा पुलिस को कब्जा......

अतिक्रमण विरोधी मुहिम में पुलिस व प्रशासन ने जिस तुफानी गति से छोटे मोटे अतिक्रमण ढहायें और सड़क किनारें बैठने वाले सब्जी विक्रेता और दिहाड़ी मजदुरों को हटाकर उनकी रोजी रोटी पर अतिक्रमण की गाज गिराकर खुब वाह-वाहीं लुटी उसके बाद वहीं पुलिस बडे भूमाफिया की बारी आने पर अपनी जमिन को छुडाने में असफल साबित होती दिखाई दे रहीं है।

रसुखदारों का प्रभाव, पुलिस कब्जा लेने के मुड़ में नहीं....

पिछले 15 वर्ष से प्रदेश में बीजेपी की सरकार रहीं है और पेटलावद के इन बडे भुमाफियाओं का सीधा सम्पर्क भाजपा से रहा है और अपने रसुख और प्रभाव का इस्तमाल करते हुए कांग्रेसी शासनकाल में भी अपना वजुद बनाते हुए पुरे नगर के सामने कियें सीमांकन को बेअसर इन भुमाफियाओं ने किया है, जनता यह सोच रहीं है कि या तो स्थानीय पुलिस इनसे प्रभावित हो गई है या प्रदेश के मुखिया कमलनाथ भाजपा के लोगो को भी सरंक्षरण दे रहे हैै। क्योंकि जानकारों की माने तो सरकारी जमिन पर कियें गयें अतिक्रमण को हटाने के लिए किसी लम्बी चोढ़ी कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती है, प्रशासन और पुलिस की यदि इच्छा शक्ति हो तो इस प्रकार के अवैध अतिक्रमण को हटाकर तत्काल कब्जा लिया जा सकता है, लेकिन करोड़ो रूपयें की बेशकिमती भूमि पर वर्षो से अपना गोदाम, मकान, आॅफिस बनाकर शासन को करोड़ों का चुना लगाने वाले भूमाफिया पर पुलिस व प्रशासन मेहरबान दिखाई दे रहीं है। जनचर्चा के अनुसार पुलिस आखिर क्यों लाचार है यह लोग सोच रहे है और अगर पुलिस खुद अपनी जमिन समाज कंठको से मुक्त नहीं करवा पाइ तो जनता की सुरक्षा करने वाली पुलिस अपनी स्वच्छ छवी को जनता के सामने कैसे प्रमाणित करेगी, क्योंकि सीमांकन होने के बाद 1 माह पुरा होने आया है लेकिन स्थानीय पुलिस अपनी जमिन को रसुखदारों से कब्जा छुडवाने के मुड में दिखाई नहीं दे रहीं है।

इनका है कहना...

इस संबंध में पेटलावद तहसीलदार जितेन्द्र अलावा ने बताया कि हमारें द्वारा कब्जा लेने की कार्रवाई की जा रहीं है।


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