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Saturday, February 29, 2020

पूण्य सलिला पंपावती गंदे नाले में तब्दील... दोनो किनारें पाॅलेथिन, बदबु और गारबेज से पटे...लाखो खर्च फिर भी नहीं हो पाया नदी का सौंदर्यीकरण..


 

पेटलावद से ओपी मालवीय की रिपोर्ट
पेटलावद। नगर की जीवनदायनी पंपावती नदी भयंकर प्रदुषण के कारण दयनीय स्थिति में है। नगर का सारा गंदा पानी इस नदी में मिल रहा है जिसके कारण खेडापति हनुमान मंदिर से लगाकर श्मशान घाट तक आधा किमी के क्षेत्र में चार गंदे नाले नदी में मिल रहे है जिनके माध्यम से नगर की समस्त गटरों का बदबुदार गंदा पानी नदी में मिल रहा है जिस कारण नदी अपना अस्तित्व खोती जा रही है। दोनों किनारों पर कचरा तथा पोलीथीन बिखरे पडे है। भैरवनाथ मवेशी मेला ग्राउंड से लगा किनारा, इमली वाला झरा,तंबोली बावडी, नाथाजी का घाट आदि स्थान गंदगी व अतिक्रमण की चपेट में है। नगर परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अध्यक्ष नदी की इस बिगडती हालत के प्रति लापरवाह बने हुए है। जबकि उक्त खुली जमीन मोरो के विचरण के लिए आवंटीत किये जाने की मांग कई बार मयूर मंच ने प्रशासन से की थी लेकिन इसके लिए भी कोई पहल नहीं की गई। गर्मी के दिनों में राष्ट्रीय पक्षी मोर नदी के प्रदूषण युक्त जल से अपनी प्यास बुझाएगें तथा बीमार हो कर मौत के मुंह में समाएंगे।
       मेला ग्राउंड में बनाया गया ट्रेंचिग प्लेस भी नगर में संक्रमण फैलने का सबब बन सकता है क्योंकि यहां नगर परिषद द्वारा कचरा डाला जाता है परंतु उसके निपटान की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। यहां से फैलने वाली गंदगी आसपास के किसानों की फसल को बर्बाद कर रही है तथा अनेक मवेशियों के लिए खतरनाक साबीत हो रही है। पंपावती नदी की सफाई के लिए नगर परिषद द्वारा अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए है, फलस्वरूप नदी का स्वरूप पूरी तरह बिगड गया है। यहां से उठने वाली भयंकर बदबु एवं यहां पनपने वाले असंख्य मच्छरों के कारण राजापुरा,राममोहल्ला, खडा बाजार, अम्बिका चौक, मालवी गली तथा करडावद दरवाजा क्षेत्र के सैकडो परिवारों में मलेरिया, चिकनगुनिया,डेंगू तथा वायरसजनीत दूसरे रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। पिछले वर्ष उक्त मोहल्लों में से लगभग 200 मरीजों को इलाज के लिए रतलाम और दाहोद तक जाना पडा किंतु फिर भी नगर परिषद की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली। पंपावती नदी के दोनो किनारों की मिट्टी धसाई के कारण बुरी हालत हो गई है। नगर के कई संगठनों ने श्रमदान कर नदी की सफाई कर दोनों किनारों पर पेड लगाने के प्रस्ताव दिए गए परंतु नगर परिषद ने इसके लिए भी कोई पहल नहीं की। सिंगल यूज पोलिथीन के प्रतिबंध के बाद सैकडो किलो पोलिथीन प्रतिदिन दोनों किनारों पर फेका जाता है। जिससे नदी अवरूद्व हो रही है। गटरों से निकला मटमैला पानी नदी में यहां वहां गडढो में भरा हुआ है। जिससे कई तरह के वायरस पनप सकते है। नदी के बाये तट पर लाखो रूपए खर्च कर बनाई गई तटबंध की दिवार भी नदी को प्रदुषण से बचाने में सफल नहीं हुई है।
    इस संबंध में नगर परिषद अध्यक्ष मनोहर भटेवरा का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा नदी की सफाई के लिए कोई धनराशि आवंटीत नहीं की गई है। यहां तक की कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं है।
इस संबंध में सीएमओ लालसिंह राठौर का कहना है कि नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए योजना बनाई गई है। पूर्व नप. उपाध्यक्ष सुरेन्द्र भण्डारी ने बताया कि नदी की साफ सफाई के नाम पर लाखों रूपयें का भ्रष्टाचार किया गया है। पंपावती नदी आज भी अपनी दुर्दशा पर आंसु बहा रहीं है।

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