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Friday, February 14, 2020

सरकारी भूमि की रजिस्ट्री शून्य घोषित होने से भू माफियाओं में अपरा तफरी तत्कालीन अधिकारी कर्मचारियों और रजिस्ट्री कांड में लिप्त रजिस्टर व सेवा प्रदाता पर भी कार्यवाही की मांग

पेटलावाद से हरिश राठौड की रिपोर्ट

बामनिया के निकट अमरगढ़ में स्थित मूल्यवान सरकारी जमीन को भू माफियाओं ने सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों के साथ सांठगांठ कर नकली दस्तावेज बनाते हुए जो जमीन बेच दी थी पेटलावद अपर न्यायधीश जैसी राठौर के न्यायालय में चले दोसा लंबे प्रकरण के बाद उस समस्त रजिस्ट्री ओं को शून्य घोषित कर दिया गया न्यायालय के फैसले के बाद भू माफियाओं में बेचैनी है ज्ञातव्य है कि उक्त रजिस्ट्री 2010 में की गई थी इसके बाद मध्यप्रदेश शासन की ओर से कलेक्टर झाबुआ के द्वारा वादी के रूप में 2011 में वादी के रूप में प्रकरण दायर किया गया जिसमें ग्राम अमरगढ़ की पटवारी हल्का नंबर दो में स्थित सर्वे नंबर 123 124 135 136 पे की रब्बा 6.2 हेक्टेयर भूमि जो 19 सौ 2930 एवं 19 सौ राजस्व अभिलेख में शास्त्री भूमि थी जिसे प्रतिवादी नोशेरु पिता खुशरू भरुजा पारसी निवासी मुंबई के वंशज एवं पिता रामराज को जिनिंग फैक्ट्री लगाने हेतु व्यवसाय प्रयोजन से शासकीय शासकीय प्रक्रिया के अनुसार आवंटित की गई थी यह भूमि बाद में राज्य उसके परिजनों के द्वारा 1987 में बतौर भूमि स्वामी हो गई यहीं से शुरू हुआ शासकीय भूमि को नकली दस्तावेज बनाकर उस पर स्वामित्व दर्शा दिया गया इसी आधार पर 2010 में दिनांक 19 2010 को कई भाषाओं को कर दी गई न्यायालय ने लंबी सुनवाई के बाद मामले में पाया कि रजिस्ट्री गलत आधार पर की गई है तथा इसमें भूमि स्वामी में गड़बड़ी करते हुए दस्तावेज बनाएं इसी के चलते रजिस्ट्री सूर्य कर दी गई आप अब भू माफियाओं में इस फैसले से बड़ी बेचैनी है दूसरी तरफ आम लोग सरकारी जमीन पर भू माफियाओं के कब्जे को निरस्त करने से खुशी की लहर दौड़ गई है

होनी चाहिए तत्कालीन मास्टर माइंड कर्मचारियों की गिरफ्तारी

इस प्रकरण में तत्कालीन तहसीलदार पेटलावद तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी पेटलावद पटवारी हल्का नंबर 2 के तत्कालीन पटवारी तथा रजिस्ट्रार पेटलावद तथा रजिस्ट्री सेवा प्रदाता पेटलावद के विरुद्ध कार्रवाई की मांग ग्राम वासियों ने की है इस मामले के प्रकाश में आने के बाद पेटलावद रायपुरिया  बरबेट सारंगी आदि ग्रामों में भी इस तरह के मामले की जांच किए जाने की मांग भी उठाई जा रही
कलेक्टर प्रबल सिपाही से जब इस मामले पर चर्चा की तो आपने कहा कि जमीन धोखाधड़ी पूर्वक दी गई वास्तव में सरकारी है जो सरकारी अधिकारी कर्मचारी कालीन समय में इस प्रकरण में लिप्त उनके विरुद्ध भी शीघ्र कार्रवाई की जाएगी

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