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Sunday, February 16, 2020

जिस घर में बेटीयों ने जन्म लिया वह परिवार धन्य हो गया.....

  • सनातन धर्म हमारें रगो में रक्त प्रवाह की तरह दोड़ रहा है......
  • आदिवासी अंचल में हो अधिक से अधिक कथाए - पं. कमलकिशोरजी नागर...
  • कथा के 5वें दिन उमडी श्रद्धालुओं की भीड़.....

जामली से जितेंद्र पाटीदार की रिपोर्ट

पेटलावद। मालवा माटी के संत प. कमलकिशोरजी नागर के मुखारविंद से ग्राम जामली में श्रीमद भागवत गीता की कथा का भव्य आयो
जन किया जा रहा है, कथा के 5वें दिन मंच से संदेश देते हुए श्री नागरजी ने कहां कि मनुष्य को अपने जीवन में दुसरों की बुराईयों को देखने से पहले खुद के अंदर की बुराईयों को देखना चाहिए पहले आप अपने परिवार के बारे में सोचे और परिवार का पुरा ध्यान रखे। कलयुग में जिन घरों में बेटीयों ने जन्म लिया है वह परिवार धन्य हो गया है, माता-पिता को अपनी पुत्री को अपनी कांख (आंचल) में और पुत्र को अपनी आंखो में रखकर ध्यान रखना चाहिए और पुत्र और पुत्री को सनातन धर्म से जोड़ना चाहिए।

सनातन धर्म हीं वट वृक्ष है.....

सनातन धर्म की जडे बहुत गहरी है और सनातन धर्म हीं शास्वत धर्म है और इस धर्म से हर मनुष्य को जुडना चाहिए। जिस प्रकार से बच्चा जन्म होने के बाद पलंग से चोरी या बदला जा सकता है लेकिन माता की गर्भ से बच्चा चुराया नहीं जा सकता ठीक वैसे हीं सनातन धर्म भारतीय संस्कृती के गर्भ से उत्पन्न हुआ है जिसे कोई चुरा नहीं सकता, सनातन धर्म हमारी रगो में रक्त की तरह प्रवाहित हो रहा है और सनातन धर्म हीं वह वट वृक्ष है जिसकी छांव में हम इस लोक को छोड़कर मौक्ष प्राप्ती की साधना कर सकते है, यदि आपके पास धन है तो उसे धर्म और गौ सेवा में लगायें और यदि धन नहीं है तो भी चिंता न करें अपना मन मानव सेवा में लगायें। दान के महत्व को समझाते हुए श्री नागरजी ने बताया कि सबसे बड़ा दान अन्न दान है और अपने जीते जी आपने जो भोजन दुसरे को करवाया वहीं सच्चा पुण्य है, मृत्यु उपरांत यदि परिजन 1 लाख लोगो को भी भोजन करवाते है तो यह देखने के लिए आप उपस्थित नहीं होते, इसलिए अपनी आंखो के सामने जिते जी प्रेम से लोगो को भोजन करवाओं।

आदिवासी अंचल में कथा के महत्व को समझाया.....

अपनी सुमधुर वाणी से हजारों की संख्या में उपस्थित धर्मप्रेमी जनता को संबोधित करते हुए श्री नागरजी ने कहां कि में बडे शहरों में कथा करने की अपेक्षा अधिक से अधिक ग्रामीण अंचलों और विशेष रूप से आदिवासी अंचल में कथा करने के महत्व को बढ़ावा देते हुए कहना चाहता हॅू कि प्रत्येक वनवासी व्यक्ति सनातन धर्म से जुड़कर धर्म से ध्यान से भटकानें वाले आडम्बरों से सर्तक और सावधान रहे, जब-जब आदिवासी भाई ग्रामीण अंचल में कथा करवाने का संकल्प लेंगे में हर समय कथा के लिए हाजिर हो जाउंगा। भगवान शंकर के गले में विराजित होने वाले नाग महाराज सबके महाराज है और भगवान शंकर सबके आराध्य देव है, सनातन धर्म से जुड़कर हीं वर्तमान पिढ़ी का भला हो सकता है। साथ हीं आदिवासी अंचल के भक्तों से मंच से हीं चर्चा करते हुए पं.श्रीनागरजी ने संकल्प दिलवाते हुए कहां की आप सनातन धर्म से जुडे और बाहर से धर्म के प्रति बरगलाने के लिए बाहर से आने वाले लोगो को हाथ जोड़कर गांव से बाहर करें।

हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तजन.....

कथा के 5वें दिन जहां रविवार का अवकाश होने से पुरा पांण्डाल धर्म प्रेमी जनता से खचा खच भरा था और कथा पूर्ण होने तक भी भक्तों का आना लगा हुआ था, यहां तक की व्यवस्थापक व आयोजन समितिया भी लोगो के बैठने के लिए निरंतर बैठक व्यवस्था बढ़ाती जा रहीं थी, पेटलावद व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा थांदला, झाबुआ, कालीदेवी, रतलाम, सरदारपुर, राजगढ़ एवं मंदसौर तथा उज्जैन क्षेत्र के अलावा गुजरात और राजस्थान से भी हजारों की संख्या में भक्तजन कथा श्रवण करने के लिए पहुंचें। कथा में क्षेत्र के विधायक वालसिंग मैड़ा अपने समर्थकों के साथ पाण्डाल में बैठकर कथा का रसपान करते नजर आयें।

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