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Monday, February 17, 2020

क्या कोरोना वायरस का इंतजार कर रहीं नगर परिषद..

पेटलावाद से ओपी मालवीय की रिपोर्ट
पेटलावद। नगर परिषद को स्थानीय जनता के स्वास्थ्य की शायद कोई चिंता नहीं है, पुरे विश्व में कोरोना वायरस से फेलने वाली सक्रामक बिमारी की रोकथाम के लिए शासन प्रशासन युद्ध स्तर पर हर संभव बचाव के तरिके अपना रहे है और जनता को भी इसके लिए सतर्क भी कर रहे है, उल्लेखनिय है कि कोरोना वायरस की बीमारी जानवरों के मांस से उत्पन्न होकर फेल रहीं है और नगर में खुले आम मांस विक्रेताओं के द्वारा मटन व मछली बिना किसी परिक्षण के बीक रहा है जिसमें मच्छर व गंदगी की भरमार रहती है लेकिन नगर की जनता के स्वास्थ्य पर खुलेआम प्रहार होते हुए भी नगर परिषद कोई कार्रवाई करने का तैयार नहीं दिख रहीं है।

जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़.....

स्वास्थ्य विशेषज्ञो की माने तो मटन व मछली को काटकर बेचने से पहले उसका उचित परिक्षण किया जाना आवश्यक है और यह भी देखा जाना आवश्यक है कि इनका सेवन करने से खाने वाले के स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव तो नहीं पढ़ रहा है। ऐसी स्थिती में जानवरों के संक्रमणों से उत्पन्न होने वाली गंभीर बिमारियों के फेलने की आशंका में खुले में बिक रहे मटन व मछली नगर की जनता के स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है।

नहीं है लायसेंस.....

नगर में लगभग 20 से अधिक मछली विक्रेता व 15 से अधिक मटन विक्रेता दुकान लगाकर व्यवसाय कर रहे है लेकिन नगर परिषद के रेकार्ड में न तो इनका कोई अधिकृत रेकार्ड है और ना हीं किसी भी विक्रेता के पास व्यवसाय संचालन के लिए लायसेंस भी नहीं है। नगर परिषद के अपुष्ठ सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसी भी मटन व मछली विक्रेता के पास शासन के निर्धारित प्रारूप में व्यापार करने की अनुज्ञत्ति/ लायसेंस नहीं है। जानकारों की माने से इस संबंध में विधिवत रूप से शासन की और से लायसेंस जारी होता है जिसमें लिखी गई शर्ता का अनुपालन करने पर हीं व्यवसाय किया जा सकता है और शर्तो का उलंघन करने पर लायसेंस निरस्त भी कियें जा सकते है। लेकिन जहां बिना लायसेंस के धडल्ले से लगभग 35 से अधिक दुकानदारों द्वारा मटन व मछली का विक्रय किया जा  रहा है, वहां जनता के स्वास्थ्य की फिक्र कोन करेगा...?

दुकानें चहेतों को कर दी हवालें......

लगभग 3 से 4 पहले मटन मार्केट के लिए शासन के लाखों रूपयें खर्च करके बनाई गई दुकानों पर मांस विक्रेताओं को बैठाने
में असमर्थ नगर परिषद के द्वारा अपने चहेतो को बिना किसी प्रक्रिया को अपनायें बगेर कब्जा दे रखा है जिसमें नगर परिषद के कर्मचारी से लेकर नगर परिषद के ठेकेदारों का सामान इन दुकानों में पड़ा हुआ है  जिसका बिना कोई किराया दियें हीं कर्मचारी व ठेकेदार उपयोग कर रहे है। साथ हीं दुकानों के परिसर में पालतु जानवर भी बंधे हुए दिखाई दे रहे है तथा नगर परिषद की मेहरबानी से कुछ लोग अपने परिवार सहित वहां निवास करने लगे है, जिससे लाखों रूपयें खर्च कर बनाई गई दुकानें अपना अस्तित्व खोती नजर आ रहीं है और दुकानें व टीन शेड नगर परिषद के द्वारा रेवड़ी की तरह अपने चहेतो को बांट दी है।

एसडीएम का आदेश नहीं मानती नप.

ऐसा लगता है कि पेटलावद की निर्वाचित परिषद और परिषद के अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों के पालन करने में न तो कोई रूची दिखाते है और ना हीं आदेशों को प्रभावी कार्रवाई भी नहीं करते है। क्योंकि जनता व मिडि़या के द्वारा लगातार मटन व मछली मार्केट की समस्या को उजागर करने से एसडीएम एमल मालवीय के द्वारा बार-बार नगर परिषद को पत्राचार करते हुए मटन विक्रेताओं को बनी हुई दुकानों में शिप्ट करने के लिए कई बारं आदेशित करने के बावजुद भी नगर परिषद एसडीएम के आदेशों की धज्जिया उडाते नजर आ रहीं है। वहीं इन समस्याओं को लेकर नगर परिषद के सीएमओं लालसिंह राठौर जवाब देने से बचने के लिए फोन तक रिसिव नहीं कर पा रहे है।

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