Breaking

Tuesday, February 4, 2020

शतायु वर्ष मैं प्रवेश कर रहे एक गांधीवादी का चिंतन देश में सिर्फ गांधीवाद नहीं गांधी की जरूरत (गांधी की 150वीं जन्म जयंती के वर्ष में एक वयोवृद्ध गांधीवादी से भेंट वार्ता)



समाचार20 से  वीरेंद्र व्यास की रिपोर्ट
सफेद धवल वस्त्र सफेद  बाल 100 वर्ष के करीब की आयु पर बिना चश्मे के अखबार पढ़ रहे उस शख्स से मुलाकात बूढ़े पन की उदासी देख देने वाली  नहीं बल्कि जीवन में आशा और जिजीविषा पैदा करने वाली रही पिछले दिनों एक पारिवारिक आयोजन   मैं मालवा की मूल भूमि कहे जाने वाले नगर बड़नगर में गांधी जी के साथ प्रार्थना करने व गांधी के संकेत मात्र पर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़े  और 1946 की तत्कालीन   अंतरिम सरकार के साथी वयोवृद्ध श्री वासुदेव त्रिवेदी भैंसला वाले से हुई भेंट जीवन की उपयोगी मुलाकातों में से एक व प्रेरणादाई रही उम्र के जिस   पड़ाव पर श्री त्रिवेदी हैं वर्तमान पीढ़ी के लिए आश्चर्यजनक और तकरीबन असंभव सा लगता है पर यह भी कि   उनकी जीवन शैली स्वालंबन सादगी  तथा आत्मनिर्भरता व आत्मविश्वास से  लबरेज दिनचर्या को देखने के बाद लगता है कि वास्तव में जीवन  निराशा थकाओपन  उबा ओपन या अनुशासनहीन फिजूलखर्ची से भरा और गैर जिम्मेदाराना नहीं हो सकता उनके जीवन के इस उम्र तक का राज जानने की जब जिज्ञासा प्रगट की तो उन्होंने   स्वावलंबी संयमित और नियमित होने का संक्षेप में  3 सूत्री जवाब दिया    लंबी आयु संबंधी  रा
ज पूछने पर उन्होंने कहा    जीवन को  संयमित तथा उपयोगिता   और उपादेयता से    
     जीना उम्र दराज होने का राज है भारतीय ग्रामीण वेशभूषा को उपयोगी बताते हुए  अनुभव के इस वट वृक्ष ने कहा कि ज्यादा कुछ नहीं पुरुष या स्त्री की धोती को ही लीजिए पहनने बांधने  तथा ओढ़ने बिछाने हर तरह के काम आने वाला यह वस्त्र है उन्होंने अपने जीवन में  धोती के विभिन्न उपयोग के किस्से भी सुनाए चर्चा के दौरान ही जब एक प्रोफेसर महोदय वहां आए तो उनके जूतों की ओर देखकर   उनसे ही उसकी कीमत पूछी ढाई हजार बताने पर वह  चौके और कहां की कितने दिन चलेंगे 1 वर्ष का उत्तर दिया तो बोले बस और हमारी तो  मोजड़ीया वर्षों चलती थी   और  दौ  रुपए में ही आती थी  मेरी और   मुखातिब  होते हुए धवल धने बालों वाले उन  वृद्ध शख्स ने कहा हमने जीवन में ₹200 से ज्यादा के जूते ना तो पहने हैं और ना ही किसी को ला कर दिए  क्योंकि गांधी जी कहते थे वस्तुओं को मूल्य के बजाय उपयोगिता से आंको निरोपयोगी को उपयोगी बनाते हुए जीवन जियो

              बातचीत के दौरान उनके  राजनीतिक विचारधारा का होना पता लगने पर  जब कुछ राजनीतिक सवाल किए तो  वर्तमान की राजनीति को मूल्य सिद्धांत विहीन बताते हुए यह भी कहा कि  पहले के नेता  चाहे किसी भी दल के हों उनका जीवन और आचरण सादगीभरा  तथा अनुकरणीय होता था पर गांधी गांधी वस्तु और गांधी चश्मे की बात  करने वालों की वेशभूषा और चमक-दमक  गांधी के किसी भी मायने में नजदीक नहीं बैठती खालीस  खादी के पुजारी श्री त्रिवेदी ने  पूरे वस्त्र वस्त्र खादी के ही पहने हुए थे अपने शर्ट के बटन खोल कर अंदर के बनियान को उतारते हुए कहा यह भी खादी का है उन्होंने एक किस्सा तत्कालीन गांधी की खादी और कांग्रेस के सक्रिय सदस्यता का बताया की तत्कालीन समय में 1942  से 1947 के बीच  बल्कि उसके बाद मध्य भारत को जमाने में भी कांग्रेस के सक्रिय सदस्य  पूर्ण खादीवादी होना जरूरी था  और सक्रिय सदस्य  खादी धारण नहीं करता तो सदस्यता निरस्त हो जाती थी

              उन्होंने कहा तब इसकी जांच करने के लिए ऊपर से समिति के लोग आते थे और खादी के  बनियान और  बंडी  की जांच करते थे अंग्रेजों के विभिन्न जुल्मों की कहानियों को सुनाते हुए उन्होंने बताया कि तब उनके बड़नगर  व रतलाम  के बीच चलने वाली रेलगाड़ी को  रात में मशाल दिखाने की बेकारी भी करवाई जाती थी  खुद उन्होंने कई बार पीरझला  स्टेशन पर अपने साथियों के साथ  ट्रेन को रात्रि  को 1:00 बजे - 2:00 बजे मशाल दिखाई  थी  ट्रेन को  मशाल दिखाते समय  मुंह ट्रेन की ओर नहीं करने दिया जाता था  बल्कि पीछे हाथ रखकर मशाल  दिखाना पढ़ती थी इस तरह के कई कष्ट अंग्रेजों द्वारा दिए जाते थे गांधी जी के साथ प्रार्थना करने व 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में स्वयं वह बड़े भाई शंकरलाल  त्रिवेदी  तथा साथियों तथा  बद्रीलाल जी दवे  आदि के शरीक होने और आजादी के बाद पहले झंडा वंदन का किस्सा सुनाते हुए कहा कि तत्कालीन समय में  कुछ व्यक्तियों द्वारा डाबरी  चौक पर चंदा देकर     झंडा फहराने की    की इच्छा जाहिर  करने पर लोगों ने विरोध किया था और राष्ट्रीय झंडा वंदन को वैयक्तिक लाभ का हिस्सा ना बनने देने और श्रद्धा तथा समर्पण  का विषय होने की बात कही थी
वर्तमान की युवा पीढ़ी के लिए गांधी जी की 150वीं जन्म जयंती के इस वर्ष में त्रिवेदी जी जैसे गांधीवादियों की जीवन शैली    और अनुभव   निश्चय ही प्रेरणादाई हो सकती है

       (आलेख लेखक राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है)

;--------------------////


समाचार एवं विज्ञापन के लिए सम्पर्क करे
राज मेड़ा 🤳7049735636, 
वोट्सप्प न.8085104199
हरिश राठौड 7974658311

Post a Comment

Post Top Ad