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Saturday, February 22, 2020

जहां से आने थी फूलों की खुशबु उस बगीचे से आ रही भ्रष्टाचार की बू......

15 साल पहले 40 लाख रूपये लगने के बाद भी नगर परिषद के स्थापना के 101 वर्ष बाद भी नगर को बालोद्यान की सौगात नहीं मिल पाई.... 

पेटलावाद से हरिश राठौड की रिपोर्ट

पेटलावद। किसी भी स्वच्छ व स्वस्थ्य नगर की निसानियां वहां के नागरिकों को दी जाने वाली मूलभूत सुविधाओं के साथ उनके स्वास्थ्य और मनोरंजन पर दी जाने वाली सुविधाएं होती है। किंतु पेटलावद नगर इन सुविधाओं से कोसो दूर है। नगर के नागरिकों नगर परिषद की स्थापना के 101 वर्ष बाद भी आजतक एक सुव्यवस्थित बालोद्यान नहीं मिल पाया है। नगर में बालोद्यान के नाम पर पूर्व परिषद द्वारा आज से लगभग 15 वर्ष पहले 40 लाख रूपये खर्च किए गए थे। किंतु उसमें भी भ्रष्टाचार किया गया। जिसके चलते जिस बालोद्यान से फूलों की खुशबु आना थी आज वहां से भ्रष्टाचार की बदबू आ रही है। वहीं नगर के हर आम नागरिक की ख्वाहीश है कि नगर में एक व्यवस्थित बालोद्यान हो जहां पर बच्चें और बुजुर्ग अपना कुछ समय बीता सके। विशेषकर गर्मी के दिनों में बालोद्यान की आवश्यकता हर किसी को लगती है। क्योंकी इस समय बच्चों की स्कूलें भी बंद हो जाती है और दिन भर घर में कैद रहने के बाद शाम के समय किसी बाग बगीचे में अपना समय बीताना चाहते है। पर नागरिकों की यह मंाग आजतक पूरी नहीं हो पाई है।
        नगर के नागरिकों को घूमने के लिए कोई सुरक्षीत स्थान नहीं मिल पा रहा है। नागरिकों को अपनी जान जोखीम में डालकर हाईवे रोडों पर तेजगती से दौडते वाहनों के बीच घूमने पर मजबूर होना पडता है। यदि कोई बालोद्यान व्यवस्थित हो जाए तो वहां आम नाागरिक घूम सकते है। बालोद्यान में आए झूले चकरी भी जंग खा रहे है। इनमें से कई सामान को बेच दिया गया। यहां तक की वर्तमान परिषद द्वारा बालोद्यान की जगह पर दुकाने निकालने का मन बना लिया था पर आमजन के विरोध के चलते परिषद को अपने इस फैसले से पीछे हटना पडा।
बालोद्यान में हुए घोटाले की वर्षो से जांच चल रही है किंतु आज तक जांच पूरी नहीं हो पाई है।

तत्कालीन एसडीएम की मुहिम भी ठंडे बस्ते में...

नगर में तहसील कार्यालय के सामने खुले पडे ग्राउंड में तत्कालीन एसडीएम हर्षल पंचोली के द्वारा जन सहयोग से एक बगीचा विकसीत करने के प्रयास किए गए, जिसमें बगीचा विकसीत करने के लिए पेवर्स लगाए गए और कुछ झूले चकरी भी लगाए गए किंतु एसडीएम का स्थानांतरण होने के बाद सारी योजना धरी की धरी रह गई। जन सहयोग से विकसीत होने वाला बगीचा आज विरान पडा हुआ है। यहां तक की इस भूमी को भी नगर परिषद द्वारा व्यावसायिक उपयोग के लिए मांगे जाने की खबरे चल रही है। नागरिकों की मांग है कि नगर परिषद पुरानी गलतीयों को भूलाकर नगर और नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नगर को एक आदर्श बगीचे का तोहफा प्रदान करें।
       नगर के जीन बगीचों से बच्चों की किलकारियां निकलनी चाहिए थी आज वहां जंग लगे और टूटे फूटे झूलों की चरचर गंुज रही है। इस संबंध में एसडीएम एमएल मालवीय से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि हमारे द्वारा किसी भी बगीचे को नगर परिषद को सौंपने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
वहीं सीएमओ लालसिंह राठौर का कहना है कि हमें बगीचा हेंडओवर नहीं किया गया है केवल वहां की साफ सफाई और पेयजल व्यवस्था की पूर्ती का निर्देश एसडीएम साहब द्वारा दिया गया है।

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