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Friday, February 28, 2020

पेटलावद थाना प्रभारी के तबादला के पीछे समाजकंटको की भूमिका......


पेटलावद से अनिल मुथा की रिपोर्ट

पेटलावद। नगर में कानून व्यवस्था की स्थिति एवं यातायात को सुचारू करने एवं अवैध अतिक्रमण हटाने में प्रशासन की ओर से सकारात्मक भूमिका निभाने वाले नगर निरीक्षक दिनेश शर्मा के स्थानांतरण से नगरवासियों में निराशा है। इस निराशा की वजह यह है कि कुछ ही समय में थाना प्रभारी ने आमजन जीवन में कानून व व्यवस्था के उंचे मापदंड स्थापीत करने में सफलता पाई थी। नागरिकों को आशंका है कि अब जल्द ही नगर फिर से अतिक्रमण की चपेट में आ सकता है। क्योंकि उक्त पुलिस अधिकारी की अतिरिक्त सक्रियता और सर्तकता के कारण जो अपराधियों में भय था वहीं नगर का यातायात भी सुरक्षीत व सुचारू हो गया था।
हालांकि थाना प्रभारी का स्थानांतरण को प्रशासनीक फेरबदल की प्रक्रिया बताया जा रहा है। परंतु पर्दे के पीछे जो खेल हुआ है उससे नगरवासियों में निराशा व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि थाना प्रभारी होने के नाते पुलिस थाना परिसर के अतिक्रमण के पंजे से मुक्त करवाने के लिए जोरदार अभियान चला रखा था। जिससे क्षेत्र के बडे भूमाफियां के हित टकरा रहे थे। पेटलावद पुलिस थाना परिसर की शासकीय जमीन को भूमाफियां की पकड से छुडाने के लिए उक्त थाना प्रभारी ने प्रशासनीक स्तर पर जो कार्रवाई की थी। उसके परिणामस्वरूप प्रशासन ने सीमांकन के लिए 6 पटवारियों और राजस्व निरीक्षक का एक दल गठीत कर दिया था। इस दल द्वारा किए गए सीमांकन में थाना परिसर की भूमि का बडा भाग समाजकंटको के कब्जे में पाया गया था। थाना प्रभारी इसी भूमि को मुक्त करवाने के लिए एडी चोंटी का जोर लगा रहे थे। यही बात भूमाफियाओं को खटक गई और उन्होंने पर्दे के पीछे से थाना प्रभारी के विरूद्व षडयंत्र रच कर उनके स्थानांतरण को हवा दी। इस दौरान श्री शर्मा के विरूद्व दुष्प्रचार करने के प्रयास भी किए गए। और प्रशासन पर दबाव बनाया गया की श्री शर्मा का तबादला किया जाए। यह मांग ऐसे मामले में की गई , जिसमें एफआईआर में लिखे विवरण का पालन करने के अलावा थाना प्रभारी की कोई भूमिका नहीं थी।
        संबंधित मामला चार माह पुराना था। परंतु प्रताडना के झूठे आरोप लगा कर थाना प्रभारी की छवि को खराब करने के प्रयास किए गए इससे आने वाले दिनों में अतिक्रमणकर्ताओं के होसंले बुलंद होगें तथा कानून के प्रति अपराधियों में भय नहीं बचेगा। इस घटनाक्रम से नागरिकों में आक्रोश है। अतिक्रमण हटाने के थाना प्रभारी के प्रयासों को कमजोर करने के लिए भूमाफियों ने जो जुगत भिडाई उससे प्रशासन के मनोबल पर भी विपरीत असर हो सकता है। क्योंकि थाना प्रभारी को हटाने के पीछे दबाव की रणनीति का सहारा लिया गया या इसमें ‘‘ टाटी की आड से तीर मारने वाली‘‘ एक मालवी की कहावत को चरितार्थ किया गया। समाजकंटको ने इस मामले में दूरी की कोडी चली पहले तो उन्होंने साम और दाम का सहारा लिया इससे बात नहीं बनी उनके स्थानांतरण की मांग करवाई गई।इससे प्रशासन में हलचल हुई और मजबूरन थाना प्रभारी को हटाना पडा। इससे प्रथम दृष्टया समाजकंटकों की इच्छापूर्ती होती दिख रही है। तथा पेटलावद में मौके की बेश कीमती जमीन अब थाना परिसर के हिस्से में आने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है इससे स्थानीय नागरिकों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है।

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