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Saturday, March 7, 2020

थाने की जमिन भुमाफिया के पंजे से छुडाने से कौन रोक रहा है पुलिस को...? भुमाफिया को अभी तक नहीं मिला स्टे...फिर भी प्रशासन ने आंखे मुंदी....



पेटलावद से अनिल मुथा की रिपोर्ट

पेटलावद। अनिल मुथा दो माह पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इंदौर में सरकारी जमिनों पर वर्षो से कब्जा जमायें बेठे भू माफियाओं, अड़ीबाजों तथा समाजकंटको के विरूद्ध बड़ी मुहिम छेड़कर आम जनता में यह संदेश देने का प्रयास किया था कि प्रदेश को किसी भी सुरत में माफियाओं के हवाले नहीं किया जाएगा। इसके बाद शहर-शहर भूमाफियाओं से सरकारी जमिन छुडाने के लिए बड़ी कार्रवाईया की गई, इसी क्रम में पेटलावद में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई जिसमें पुलिस व प्रशासन ने पुलिस थाना परिसर मद की भूमि से संबंधित पुराने दस्तावेज निकाले, इन दस्तावेजो ंके अवलोकन से पुलिस अधिकारी भोचक्के रह गयें क्योंकि पुलिस थाना पेटलावद मद  की जमिन के बडे भुभाग पर भू माफिया, भुजंग अपना फन फैलायें बैठे है, इस स्थिती में तत्कालिन थाना प्रभारी दिनेश शर्मा ने उन दस्तावेजों के आधार पर तहसीलदार पेटलावद के थाने की भूमि का सीमांकन करवाने का आवेदन दिया। प्रदेशभर में अतिक्रमण मुहिम के तहत स्थानिय प्रशासन ने राजस्व विभाग के पटवारी तथा राजस्व निरिक्षकों के 6 सदस्सीय दल को सीमांकन कर रिपोर्ट देने के आदेश दियें। उक्त दल ने जब थाना परिसर की भूमि का सीमांकन किया तो पाया कि उसके बडे भुभाग पर भूमाफिया ने बडे भवन तान दियें, सीमांकन दल ने पंचनामा बनाकर अतिक्रमण होना बताते हुए अपनी रिपोर्ट तहसीलदार को सोंप दी। न्यायालय तहसीलदार पेटलावद ने इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए अवैध अतिक्रमण हटाने संबंधित आदेश पारीत कर दिया। यहीं से भू माफियाओं ने अपनी पहुंच और रोब का प्रयोग करते हुए मुख्यमंत्री की मंशाओं पर पानी फैरते हुए उक्त आदेश को ठण्डे बस्तें में डलवा दिया।
सीमांकन रिपोर्ट यह स्पष्ट उजागर हुआ कि सीमांकन पंचनामें के अनुसार सर्वे नंबर 1949 में नेमकुमार पिता हमिरमल बरबेटा का पक्का मकान एवं गोडाउन बना हुआ एवं इसी भूमि पर पक्का सी.सी. रोड़ भी मौके पर बना है, इसी के अलावा इसी सर्वे नंबर में लगभग 108 वर्गमीटर पर नेमकुमार बरबेटा के द्वारा संचालित की जा रहीं प्रायवेट कंपनी का बना हुआ पक्का भवन एवं 0.04 हैक्टेयर की भूमि पर नितेष कुमार बरबेटा एवं मनोज कुमार बरबेटा का अवैध कब्जा मौके पर पाया गया। इस तरह से शासन के द्वारा पुलिस थाने को दी गई जमिन के बडे भुभाग पर उक्त रसुखदार / भुमाफियाओं का मौके पर कब्जा पाया गया।
न्यायालय तहसीलदार पेटलावद द्वारा पारीत आदेश को हवा में उडाते हुए अब तक भू माफियाओं की अवैध बिल्डिंगे शासन प्रशासन में बैठे बडे नेताओं को मुह चिडा रहीं है तथा मुख्यमंत्री के माफिया मुक्त प्रदेश बनाने के इरादें को धुल में मिला रहे है।

एसपी, कलेक्टर का उदासिन रवैया खडे करता है प्रश्न चिन्ह..

मामले में एसपी एवं कलेक्टर जिस तरह से चुप्पी साधे बैठे है उससे कई तरह के संदेह उत्पन्न होते है क्योंकि अतिक्रमण के नाम पर पेटलावद में अनेक अतिक्रमण जिनके माध्यम से छोटे मोटे रोजगार नागरिकों के द्वारा चलायें जाते थे उन्हें तोड़कर प्रशासन ने मुख्यमंत्री को खुश करने की कवायद की थी, एैसे लोगो को सुनवाई का कोई मौका भी नहीं दिया गया था तथा जेसीबी के द्वारा मिनिटो मे ंऐसे अतिक्रमण गिरा दियें गयें थे, लेकिन जब बडे रसुखदारों तथा भाजपा में महत्वपूर्ण पहुंच रखने वाले भु माफिया की बारी आई तो प्रशासन उनके सामने नतमस्तक हो गया।

जान बुझकर गफलत में है प्रशासन....

पुरा मामला स्पष्ठ होने के बाद भी प्र्रशासन के अधिकारी जिस तरह के बयान दे रहे है उससे लगता है कि वें जान बुझकर गफलत में होने का स्वांग कर रहे है, इस संबंध में कलेक्टर प्रबल सीपाहा से भू माफिया का अवैध कब्जा हटाने संबंधी तहसीलदार के आदेश के क्रियांवयन संबंधी बात की गई तो उनका कहना था कि मुझे एसडीएम ने बताया कि मामला सिवील न्यायालय में इसलिए अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि भू माफिया को सिवील कोर्ट ने अभी तक कोई स्टे आर्डर नहीं दिया है, स्टे आर्डर लेने संबंधी आवेदन भू माफिया ने सिविल कोर्ट को दिया तो है परंतु न्यायालय में उस पर अभी कोई आदेश नहीं दिया, ऐसी स्थिती में तहसीलदार का आदेश यथावत मानकर प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है। इससे पता चलता है कि भू माफिया ने साम, दाम, दण्ड, भेद के हथकण्डे अपना लिया है।
भु माफिया के अतिक्रमण को इंदौर की तर्ज पर ंहटाने की बात पर कमिश्नर आकाश त्रिपाठी ने भी यह माना की यदि सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार ने जो आदेश दियें है उसके अनुसार पुलिस अधिक्षक को थाने मद की जमिन को वापस लेने की कार्रवाई तुंरत करना चाहिए।
आम लोगो में यह चर्चा है कि प्रशासन और माफिया के इस लड़ाई में क्यां अपने प्रभाव के दम पर बडे भुमाफिया बच निकलेंगे और गरीब लोग इसकी बली चढ़ जाएगें। प्रशासन आखिर क्यों भु माफिया को इतना समय दे रहा है यह संदेह से घिरा हुआ है।

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