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Monday, May 18, 2020

कोरोना लाक डाउन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग को बनाया कनेक्टिविटी का नया जरिया...



समाचार20 से वीरेंद्र व्यास की रिपोर्ट

 वैसे तो सोशल  डिस्टेंसिंग को कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने का एक बड़ा आधार  चिकित्सा क्षेत्र के साथ ही विश्व की सभी सरकारों द्वारा भी बताया जा रहा है और हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने भी 2 गज की दूरी का नारा इस संबंध में देशवासियों को दिया है और इस सोशल distancing  के पालन हेतु  ही लॉक डाउन का एक बहुत बड़ा कदम भारत सरकार ने  व प्रांत सरकारों ने पिछले दो माह में उठाया हुआ है इसके चलते जहां आम आदमी व मजदूर किसान आदि अपने घरों की ओर लंबी लंबी सड़कों का डिस्टेंस पैदल नापते हुए भी घर की और पहुंच रहे हैं वहीं इस लॉक डाउन व सोशल distancing के बावजूद भी न्यायालय कार्य   व सरकारी तंत्र का भी चक्र  नहीं  रुके इस हेतु वीडियो कांफ्रेंसिंग का तरीका अपनाया जा रहा है और चाहे न्यायालय की सुनवाई हो या सरकार के मंत्रिमंडल की बैठक अथवा पीएम की विभिन्न राज्यों के सीएम से बात हो या मंत्रियों की अधिकारियों से मंत्रणा हो यह सारा प्रमुख कार्य मुख्य रूप से वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा ही पिछले महीनों से किया जा रहा है विभिन्न प्राइवेट कंपनियों के दफ्तरों व सरकारी दफ्तर भी वर्क फ्रॉम होम की पॉलिसी को अपना  रहे हैं वैसे तो इसे कोरोना के संकट के संक्रमण के डर से उठाया गया कदम कहां जा रहा है किंतु यदि इसे वर्तमान के अलावा भविष्य की उपयोगिता से देखा जाए तो यह सिर्फ भारत ही नहीं अन्य देशों में एक बड़ा नवाचार साबित होगा बल्कि वर्क कल्चर पर भी इसका बड़ा प्रभाव देखने में आएगा और कई मायनों में सरकारी व कंपनियों के खर्चों में भी कमी आ रही है ,यही नहीं काम के घंटे भी एक तरफ से स्वेच्छा पूर्वक बढ़ गए हैं और सुविधा के अनुसार प्राइवेट कंपनियों के लोग अपने-अपने घरों में ही अपने कामों को अंजाम दे रहे हैं अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के लास एंजलिस में एक निजी  आईटी कंपनी के कार्य मैनेजर श्री संदीप पंड्या ने इस संबंध में दूरभाष चर्चा में बताया कि वे स्वयं तथा उनके सहयोगी व सैकड़ों अधिकारी कर्मचारी गण वीडियो कांफ्रेंसिंग तथा लैपटॉप आदि के माध्यम से अपने कामों को अपने घरों से ही अंजाम दे रहे हैं और घर से कार्य करने पर भी काम के घंटों में कमी नहीं आई है बल्कि महीने में  दो से तीन दिन का काम अधिक हुआ है उन्होंने बताया कि घर से काम करने वाले कर्मचारी अपनी सुविधा से काम करते रहते हैं और उन्हें ऑफिस जाने की तैयारी रास्ते में लगने वाला समय और शाम को वापस घर आने की जो मानसिकता रहती है उससे मुक्ति मिली हुई है और इसीलिए काम काफी मन से किया जा रहा है उन्होंने बताया कि इस तरह के मौके का कार्य प्रणाली के रूप में अपनाने के प्रयास किए जा रहे हैं इस कार्यप्रणाली से ऑफिस आने-जाने व फाइलों का खर्च  तथा प्रदूषण से और  फ्यूल खर्चे से भी कंपनियों के लोगों को भी राहत मिलेगी , वहीं भारत के उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारत सरकार के मानव संसाधन विभाग के आईसीपीआर की डायरेक्टर डॉ पूजा व्यास बताती हैं कि हमारे विभाग में अक्सर आयोजित होने वाले सेमिनार व अभ्यास संगोष्ठी स्टडी सर्कल के कामों को भी हमारे विभाग द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए से अंजाम दिया जा रहा है अभी गत 15 मई को ही लखनऊ बनारस कोलकाता पटना दिल्ली आदि स्थानों पर बैठे हुए विभिन्न शिक्षाविदों के मध्य स्टडी सर्कल की एक राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई जिसको की आईसीपीआर के चेयरमैन प्रोफेसर आरसी सिन्हा एवं मेंबर सेक्रेट्री प्रोफेसर कुमार रत्नम द्वारा संबोधित किया गया और एथिक्स ऑफ डेवलपमेंट इन मॉडर्न एरा जैसे विषयों पर संवाद हुआ इस गोष्ठी को लखनऊ आईसीपीआर केंद्र की ओर से आयोजित किया गया गोष्टी   क ऑनलाइन समन्वयक डॉक्टर जयशंकर थे . डॉक्टर पूजा व्यास ने बताया कि इस नवाचार को आगे भी जारी रखने संबंधी कार्य योजना आईसीपीआर  के चेयरमैन आदि द्वारा मानव संसाधन विभाग दिल्ली के मार्गदर्शन में बनाई जा रही है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन एजुकेशन के संबंध में मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित आदिवासी बहुत जिला झाबुआ भी इस तकनीक के साथ कदम मिलाता हुआ साफ नजर आ रहा है और इस जिले के पेटलावद तहसील में स्थित गुरुकुल अकादमी के स्कूल द्वारा इसकी शुरुआत भी की गई है कोरोना वायरस की बीमारी के एवं पर्यावरण के मुद्दों को लेकर इस स्कूल द्वारा अपने प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं के लड़कों लड़कियों की एक चित्र प्रतियोगिता आयोजित की थी जिसमें कि बच्चों ने काफी क्षेत्र ऑनलाइन ही अपने स्कूल को भिजवाए जिसमें कि जहां एक  कोरोना बीमारी के सोशल डिस्टेंसिंग के चित्र थे तो वहीं प्रदूषण एवं प्रकृति संबंधी चित्रों को भी छोटे बच्चों द्वारा बनाया गया था स्कूल की प्रमुख अध्यापिका नीलिमा जैनके अनुसार  बच्चे  ऑनलाइन  एजुकेशन  में भी रुचि दिखा रहे हैं वही देश की बात करें तो पिछले दिनों जो कोरोना बीमारी  कोविड 19 पर प्रधानमंत्री द्वारा 20 lakh करोड़ का आर्थिक पैकेज देकर उन्नीसा पर बीसा देश को दिया जाने की घोषणा की है और इस आर्थिक पैकेज में भी दीक्षा शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ग्रामीण अंचलों तक ऑनलाइन एजुकेशन की कार्य योजना लागू की जा रही है इस सबके चलते कुल मिलाकर जहां कोरोना का संकट एक संक्रमण की बीमारी माना जा रहा है और जिसके कारण की पूरा देश व दुनिया आर्थिक संक्रमण के दौर से गुजर रही है ऐसे में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जो सोशल कनेक्टिविटी का एक नया रूप दूर रहते हुए भी कनेक्टिविटी का एक नया व बड़ा जरिया बनता जा रहा है  और इस मायने में कोरोना जहां अभिशाप है वही इस अभिशाप में कुछ वरदान भी निकल कर देश वव्यक्ति कि जीवन प्रणाली में आ रहे हैं .

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