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Thursday, May 21, 2020

क्या नई पिढ़ी देखेगी पंपावती की सुंदरता...? अतिक्रमण और गंदगी से मिले निजात तो बन सकता है सुंदर स्थान..

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समाचार20  से ओपी मालवीय की रिपोर्ट

पेटलावद। नगर के हद्य स्थल पर बहने वाली क्षेत्र की गंगा पंपावती नदी जो कि पुरे क्षेत्र को जोड़ती है, जिसे पेटलावद की जीवनरेखा भी कहते है और जिसके जीवनदायिनी अमृत जल से क्षेत्र के प्यासों व किसानों के खेतो की प्यास बुझती है। नदी के दोनो किनारों पर धर्म एवं आस्था के प्रतिक पुरातत्वकालिन मंदिर स्थित है। एक जमानें में इसके एक छोर से दुसरे छोर तक जाने में लोगो को भय रहता था और जो पुरे वर्ष निर्मल जल की कल-कल आवाज से नगरवासियों के हद्य स्थल में आंन्नद घोल देती थी। एक समय था जब इस नदी किनारें बनी हुई झिरी पनिहारी से पीने का पानी भरने पनिहारिन जाया करती थी, लेकिन आज इस पंपावती नदी की दूर्दशा से पुरा नगर अपने आपकों शर्मिंदा महसुस करते हुए इसके जिर्णोद्धार व पुर्नउत्थान की मांग कर रहा है।
पवित्र नदी में नगर की गंदगी......
नगर की नालियों का गंदा पानी, अपशिष्ठ मटेरियल और कत्ल खानों से निकलने वाली गंदगी सीधे पंपावती नदी में मिल रही है, जिसके कारण दिन प्रतिदिन नदी में गंदगी बढ़ रहीं है। वहीं नगर परिषद के द्वारा पुरे नगर का कचरा एकत्रित कर नदी किनारे स्थित मेला ग्राउंड में डाला जाता है, यह कचरा प्लास्टिक धिरे-धिरे नदी में आकर मिलता है जिससे नदी गंदी, मटमेली और बदबुदार हो रही है। इसके अलावा नदी के किनारे आज भी खुले में शोच जाने वाले लोगो की संख्या बहुत अधिक है और यह गंदगी भी नदी में हीं समाहित होती है जिसके चलते पवित्र नदी गंदे नाले के रूप में परिवर्तित होती जा रही है।
अतिक्रमण की चपेट.......
नदी के दोनो किनारें इस समय नगर परिषद व प्रशासन की अनदेखी के चलते अतिक्रमण की चपेट में है। एक छोर पर नदी किनारे रहने वाले लोगो के द्वारा अपने मकानों का पिछले दरवाजों का निकासी हिस्सा आगे बढ़ाते हुए नदी किनारों पर निर्माण कार्य कर अतिक्रमण किया जा रहा है और खराब निर्माण सामग्री को नदी के किनारों पर फेंका जा रहा है तो दुसरे छोर पर ईंट भट्टे बनाने वाले लोगो ने अपने भट्टो को लगाते हुए लगभग आधे मेला ग्राउंड तक अतिक्रमण कर लिया है, और इन भट्टो से निकलने वाला धुंआ और गंदगी तथा ईंटे बनाने में उपयोग आने वाले सभी सामग्री गंदगी के रूप में पंपावती नदी में फैक दी जाती है। वहीं ईंटे तैयार करने के लिए नदी के पानी का दोहन भी बेरोकटोक मोटरों के माध्यम से किया जा रहा है।
योजना बनी कागजों पर....
नदी के जिर्णोद्धार के लिए बड़ी-बड़ी बाते की गई लेकिन नतिजा शुन्य रहा, पंपावती नदी के लिए स्थानिय नगर परिषद द्वारा बनाई गई योजनाए भी पानी में बह गई, नप. द्वारा कई बार इस नदी को साफ-सफाई एवं गहरीकरण करने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के पिछले कार्यकाल में तत्कालिन प्रभारी मंत्री विश्वास सारंग एवं जिला प्रशासन की पुरी टीम द्वारा नगर परिषद तथा नगर के गणमान्य नागरिकों के सहयोग से श्रमदान करते हुए इस नदी की सफाई की भी योजना बनाते हुए सफाई अभियान चलाया गया लेकिन यह पुरा अभियान मात्र कागजों पर सीमटकर रह गया और नदी आज भी विरान पड़ी है। हांलाकि प्रकृती जब अपना रूप दिखाती है तो सारे पाप धुल जाते है, वैसे हीं सरकारी कागजों पर तो पंपावती का उद्धार नहीं हुआ लेकिन जिस दिन प्रकृती और नदी ने अपना रोद्र रूप दिखाया उस दिन सब पाप (दोनो किनारों के अतिक्रमण) अपने आप धुल जाएगें। समय है पंपावती नदी का उद्धार करने के लिए स्थाई कारगर योजना बनाकर लागु करने का  जिससे की नगर की जीवन रेखा कहलाने वाली नदी का सोदंर्य देखने का सोभाग्य आने वाली पिढि़यों को भी मिलता रहे।
एैसे हो सकता है सद्पयोग....
नागरिक रितेष जोशी, पंकज पटवा, पियुष पटवा, पियुष जोशी, अशोक गादिया, रितेश निमजा, ऋषभ मुरार, बबलु भट्ट, राकेश सोनी, संजय चतुर्वेदी, गीरी परिहार, गोतम मुरार, अभय निमजा, सोरभ सोनी आदि नागरिकों ने पंपावती नदी की सफाई एवं अतिक्रमण मुक्त करने के लिए ठोस योजना बनाने की मांग की है जिससे की नदी को स्वच्छ व सुंदर रखा जा सकें साथ हीं नगर परिषद चाहें तो नदी किनारों के आसपास साफ सफाई करवाकर नाइट लेम्प आदि लगा दे तो आसपास के लोगो के लिए टहलने का स्थान भी बन सकता है।

इनका है कहना....

इस संबंध में वार्ड 12 के पार्षद अशौक शर्मा ने बताया कि मेरे द्वारा घाट पर एकत्रित हो रहे गंदे पानी की निकासी के लिए मोटर लगाकर हटाने और पडे हुए खराब मटेरियल को उठवाकर अनयंत्र फिकवाने का प्रस्ताव बनाकर नगर परषिद को दिया है, जल्द हीं इस संबंध में कार्य योजना बनेगी।



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