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Sunday, May 17, 2020

दाना पानी के लिए भटकते मोर.... कागजों पर बनी योजनाए, जमिनी स्तर पर गायब....


पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट

पेटलावद। पक्षियों में सबसे सुंदर पक्षियों की उपमा प्राप्त करने वाला तथा राष्ट्रीय पक्षी का तमगा लियें एक मात्र पक्षी मोर हीं है, जिसे सबसे पहले बादल के बरसने की खबर मिलती है और मोर नाच-नाचकर मधुर आवाज निकालकर लोगो को बरसात होने के संकेत भी देता है। इस जीव के पंख फैलाकर नृत्य करने का दृष्य जो भी देख ले वह अपने आपको आंन्दीत महसुस करता है।

सबसे ज्यादा है मोरो की संख्या....

पुरे झाबुआ जिले में पेटलावद क्षेत्र में सर्वाधिक मोर की संख्या है। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाहीं के चलते मोरो कों इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। मोरो के नाम पर बड़ी-बड़ी बाते करने वाले भी इस समय कोई ध्यान नहीं दे रहे है। गर्मी के इन दिनों में मोरो पर भी संकट के बादल मंडरा रहे है। ग्राम करड़ावद, टेमरिया, पंथबोराली आदि क्षेत्रों में भी मोर काफी संख्या में है।

योजना कागजों पर.....

कहने को तो पेटलावद क्षेत्र मोरो की नगरी के नाम से जाना जाता है, लेकिन उन्हीं मोरो को लेकर यहां का प्रशासन कितना सजग है, इसका अंदाजा मोरो के इधर उधर भटकने से लगाया जा सकता है। इन दिनों मई कि गर्मी पुरे परवान पर चढ़कर अपना कहर बरसा रहीं है तथा वर्तमान में तापमान 35 से 40 डिग्री तक पहुंच चुका है, लोगो को गर्मी से राहत पाने के लिए कई जतन करने पड रहे है, लेकिन सबसे ज्यादा दयनिय स्थिती पशु, पक्षी व राष्ट्रीय पक्षी मोर की है। मोरो की अधिक संख्या और इनके बचाव के लिए शासन ने काफी समय पूर्व योजना बनाई थी और जिला कलेक्टर के निर्देश पर अनुभाग स्तर पर मोर समिति मयुर मंच का गठन भी किया गया था जिसमें अनुभाग स्तर के अधिकारीगण, मोर प्रेमी,गणमान्य नागरिक तथा वन विभाग के अधिकारी सम्मिलित थे, जिनके द्वारा मोरो के लिए गर्मी के समय दाना पानी की व्यवस्था करने के साथ हीं स्थानिय विश्राम ग्रह में अस्थाई रूप से मयुर पार्क का भी निर्माण किया गया था किन्तु प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह व्यवस्था पूर्ण रूप से अपना उद्ेश्य खो चुकी है। नगर सहित आसपास के मोर प्रेमियों द्वारा अपने स्तर से मोरो के लिए अपने घर की छतो पर दाना पानी की व्यवस्था की जाती है। साथ हीं पेटलावद की पंपावती नदी के किनारे आज भी बडी तादात में मोर मिलते है जो दाना पानी की लालच में नगरिय क्षेत्र की और आ जाते है जहां वह करंट, कुत्ते तथा अन्य जानवरों का शिकार हो जाते है। करड़ावद क्षेत्र के कुछ युवाओं द्वारा खेतो व आसपास के जंगलों में मोरो के लिए दाना पानी की व्यवस्था अपने स्तर से की जा रहीं है। मोर प्रेमियों द्वारा शासन से पून मांग की जा रहीं है कि मोरो के लिए कोई स्थाई एवं ठोस योजना बनायें अन्यथा क्षेत्र में इस राष्ट्रीय पक्षी की संख्या धिरे-धिरे और कम हो जाएगी। प्रकृती की इस अनमोल धरोहर को आने वाले पिढ़ी को देखना भी नहीं मिलेगा।

हुई बहुत राजनिती....

मोरो को लेकर राजनितिक पार्टियों ने कई बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने के साथ हीं राज्य व केन्द्र स्तर से मदद दिलाने, मयुर पार्क बनाने और फंण्ड उपलब्ध कराने की बाते तो कर ली, लेकिन स्थिती यह है कि आज तक सबसे बडे मोरो के इस क्षेत्र को मयुर पार्क बनाने के लिए सरकारी जमिन भी नसीब नहीं है, तथा प्रकिया अधर में अटकी है। आलम यह भी है कि काफी समय से मोरो के सरंक्षण के लिए बनाई गई समिति और अधिकारियों की बैठक तक आयोजित नहीं हुई है, तो फिर कैसे होगा मोरो का सरंक्षण..?

इन्होने कहां.....

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पीटीआई संवाददाता विरेन्द्र व्यास ने कहां कि राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए कारगर तरिके से काम होना चाहिए। राष्ट्रीय पक्षी मोर के लिए ठोस योजना बनाई जाना चाहिए अन्यथा यह प्रजाती धिरे-धिरे विलुप्त हो जाएगी।

मयुर मंच के वरिष्ठ सदस्य जितेन्द्र कटकानी ने कहां कि वर्तमान में मोरो के लिए संक्रमण का काल चल रहा है। मयुर मंच की बैठक हुए काफी समय हो गया है, सरकार ने मयुर पार्क बनाने के लिए जमिन आवंटन की घोषणा की थी वह भी अधुरी है। कागजों पर चल रहीं कार्यवाहीं को जमिनी स्तर पर अमल में लाना चाहिए।

एसडीएम एमएल मालवीय ने कहां कि लॉक डाउन के चलते बैठक आयोजित नहीं की गई है, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों को मोरो के लिए दाना पानी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया जा रहा है। जल्द बैठक भी आयोजित की जाएगी।



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