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Sunday, June 21, 2020

राजनितिक स्वार्थ में लाखों का स्लाटर हाउस पड़ा विरान..... कलेक्टर के आदेश पर भारी नप. की राजनिति....... जनता की स्वास्थ्य के साथ हो रहा खिलवाड़, बिना पंजियन के कर रहे व्यापार...


पेटलावाद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट

पेटलावद। मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष मानसुन समय पर होने और अच्छी बारिष होने के संकेत देने के बाद सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन कलेक्टर प्रबल सीपाहा के द्वारा गत दिनों मतस्य एवं आखेट अधिनियम के प्रावधानों के तहत सम्पूर्ण जिले में नदी व तालाबों पर मछली पकड़ने एवं व्यापार करने पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है। कलेक्टर के इस आदेश से पुरे जिले सहित पेटलावद एवं आसपास के क्षेत्रों बने हुए तालाबों व नदी में मछली पकड़ना कानूनी रूप से वर्जित हो गया है। वहीं नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में मछली विक्रय पर भी रोक लगी हुई है।

खुलेआम बिक रहीं मछली-मटन...

नगर के मुख्य मार्ग वार्ड क्रमांक 11, वार्ड 13 राजापुरा आदि क्षेत्रों मे मछली व मटन खुलेआम बिक रहा है। जब मछली के आखेट पर रोक लगी है तो बाहर से कई प्रकार की मछलियों को लाकर उनका व्यापार करना सीधे-सीधे कलेक्टर के आदेश का उलंघन है, साथ हीं मछली व मटन को काटने और बेचने में साफ, सफाई, बिना परिक्षण और गुणवत्ता की जांच कियें बगेर हीं बेचा जा रहा है जो सीधे-सीधे ग्राहकों के स्वास्थ्य से खिलवाड है। वहीं नगर के मध्य में हीं चल रहे इस व्यापार से आसपास के रहवासी खासे परेशान होते दिखाई दे रहे है। सेंकड़ों बार नगर की जनता ने प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत और नगर के संबंध में होने वाली हर बैठक में इस मुददे को उठाया गया लेकिन जिम्मेदार है कि इस और कार्यवाहीं करना हीं नहीं चाहते है।

लाखों को स्लाटर हाउस विरान....


मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा मछली व मटन के विक्रय और व्यसाय के लिए योजना बनाकर प्रस्ताव मांगा गया था जिसके चलते लगभग 5 वर्ष पूर्व नगर परिषद के द्वारा प्रस्ताव बनाकर भेजा था जिस पर से मेला ग्राउंड रोड़ पर राजापुरा में मछली व मटन विक्रय के लिए लाखों रूपयें खर्च करके दुकानें बनवाई गई है जो पिछले 5 वर्षो से शुभारंभ की राह देख रहीं है, वहीं मटन विक्रेताओं की मांग पर टीन शेड़ का भी अलग से निर्माण किया गया है लेकिन स्थिती जस के तस है।

आवंटन में क्यों हो रहीं देरी....

सुत्रों की माने तो इन दुकानों को मटन व मछली विक्रेताओं को पंजियन के आधार पर आवंटीत करना है और मात्र किराया हीं वसुल करना है, इस संबंध में नगर के पार्षदों ने बताया कि पिछले 3 वर्षो में दुकानें आवंटन को लेकर नगर परिषद में लेटर पेड़ देकर मांग कर चुके है लेकिन अभी तक परिषद इस संबंध में निर्णय नहीं ले पाई है। वहीं नप. सीएमओं लालसिंह राठौर का कहना है कि मटन व मछली विक्रेताओं के पंजियन के आधार पर दुकानें आवंटीत की जाएगी तो कुछ पार्षदों का मानना है कि स्लाटर हाउस योजना के तहत मात्र किराया वसुल कर दुकानें दी जाना चाहिए और मछली विक्रेताओं को पंजियन की कोई आवश्यकता नहीं है। साथ हीं नगर परिषद में मटन व मछली विक्रेताओं के अधिकृत पंजियन संबंधी कोई भी रिकार्ड उपलब्ध नहीं है, जिसका सीधा अर्थ है कि जितने भी मांस विक्रय कर रहे है वह बिना किसी अनुमति के अवैध रूप से व्यापार संचालित कर रहे है और जहां कोई भी व्यापार बिना अनुमति के किया जाता है उस पर कानूनी कार्यवाहीं की जा सकती है।

5 साल बिते नहीं हुई दुकानें प्रारंभ....

लेकिन इस पुरे मामले में नप. का गेर जिम्मेदाराना रवेया स्पष्ठ रूप से सामने आ रहा है, जिस योजना के तहत लाखों रूपयें सरकार से स्वीकृत करवाकर दुकानें बनाई गई है उसी योजना के नियमों के तहत दुकानें आवंटीत की जाना चाहिए लेकिन स्थानीय राजनिती के चलते जनप्रतिनिधि अपने निजी हित साधने के चक्कर में शासन द्वारा दियें गयें लाखों रूपयें से बनी दुकानों को पिछले 5 साल में चालु नहीं करवा पायें और नगर की जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ और खुलेआम कानून की धज्जिया उडा रहे है।



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