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Friday, June 12, 2020

किसानों ने बोवनी प्रारंभ की.... नवाचार के साथ खेती करने को तैयार क्षेत्र के किसान.... प्लास्टीक पल्लीयों की बिक्री बढी।

किसानों ने बोवनी प्रारंभ की....  नवाचार के साथ खेती करने को तैयार क्षेत्र के किसान....   प्लास्टीक पल्लीयों की बिक्री बढी।
फोटो बोवनी करते किसान


पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट

पेटलावद। पेटलावद क्षेत्र कृषि के क्षेत्र में हमेशा नवाचार करने के लिए प्रसिद्व रहा है।यह समय कृषि व्यवसाय से जुडे लोग और किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस समय बोवनी की तैयारियां चल रही है। इस वर्ष क्षेत्र में 50 हजार हेक्टेयर भूमि पर बोवनी की संभावनाएं जताई जा रही है। सर्वाधिक रूप से सोयाबीन,टमाटर, मक्का व कपास को स्थान दिया जाएगा। इसके साथ ही सब्जी वर्गीय फसलों की ओर भी किसानों का ध्यान अधिक है।जिसके चलते  क्षेत्र में किसान मुख्य फसलों के साथ सब्जी व फल की खेती में भी नवाचार करते हुए आधुनिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे है। जिससे केवल बोवनी के समय ही नहीं हमेशा किसान खेती के लिए कुछ न कुछ नया करते हुए दिखाई दे रहे है।

बाजारों की रोनक बढी।

लगातार तीन दिनों से शाम के समय बारिश का दौर जारी है। जिसके चलते किसानों में उत्साह का माहौल है। किसानों ने खेतों में बोवनी की तैयारियां प्रारंभ कर दी है। जिसके चलते क्षेत्र के बडे बाजारों में कृषि संबंधि सामग्री खरीदने के लिए किसानों की भीड देखी जा रही है। विशेष रूप से खाद बीज की दुकानों पर किसानों का मैला सा लग रहा है।

बोवनी हुई प्रारंभ।

क्षेत्र में कई किसानों ने दो तेज बारिश होने के बाद ही बोवनी का कार्य प्रारंभ कर दिया है। किंतु कृषि विभाग का कहना है कि अभी बोवनी की जल्दी नहीं करना चाहिए क्योंकि यह मानसून की बारिश नहीं है। यह जो बारिश है यह तूफान के कारण उत्पन्न हुई परिस्थितियों के चलते हो रही है। अभी हमारे क्षेत्र में मानसून को आने में लगभग 15 दिन से अधिक का समय लग सकता है। फिर किसानों ने बोवनी प्रारंभ कर दी है। बाजारों में खरीदारी के बाद क्षेत्र में खेतों में किसान बुवाई करते नजर आ रहे है। अपने सभी काम बंद कर किसान बुवाई में लग गए है। कुछ किसान बाद में बोवनी करने के लिए रूके हुए है। क्षेत्र में हमेशा ऐसा ही होता है सभी किसान एक साथ बोवनी नहीं करते है कुछ किसान पहले बोवनी करते है तो कुछ बाद में करते है। जिसके चलते फसलों के आने में समय का अंतर होता है।

सब्जियों का बाजार उभरा।

मुख्य फसलों की बुवाई का समय 15 जून से 15 जुलाई के मध्य रहता है। किंतु पिछले कुछ वर्षो से किसानों मुख्य फसल सोयाबीन,कपास, मक्का के साथ साथ सब्जियों वाली फसलों पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। जिसके चलते किसान पूरे वर्ष उससे नगद आमदनी प्राप्त करते रहते है। क्षेत्र में विशेष रूप से टमाटर, शिमला मिर्च, गोबी, हरि मिर्ची, प्याज आदि का उत्पादन भी प्रचुर मात्रा में होने लगा है। इसके साथ ही गिलकी, तरोई, पालक,ग्वारफली,भींडी, आल,धनिया सहित अन्य सब्जी वर्गीय फसलों का उत्पादन होता है।जिसकी बिक्री स्थानीय मंडी और स्थानीय बाजारों में की जाती है। कुछ समय से सब्जीयों का एक नया बाजार उभर कर पेटलावद क्षेत्र में सामने आया है। जिससे कई लोगों को रोजगार भी मिला है। और किसानों की आवक भी बडी है।

प्लास्टीक का पल्लियां गरीब की छत।

वहीं अपने कच्चे आशियानों को ठकने के लिए किसानों द्वारा प्लास्टीक के पल्लीयें की खरीदी भी जमकर की जा रही है। बारिश के प्रारंभ में क्षेत्र में प्लास्टीक के पल्लीयों का बडा व्यवसाय होता है। जिस कारण से कई कपडा व्यापारी वर्ष भर इन प्लास्टीक पल्लीयों का स्टाक कर रखते है। और बारिश आने के एक से दो सप्ताह में इसकी बिक्री भरपूर होती है। जिसका मुख्य कारण कच्चे मकान और झोपडियां है। जिन्हें पानी से सुरक्षीत रखने का एक मात्र सस्ता उपाय प्लास्टीक पल्लया ही है। जो की बारिश के दिनों में छत का कार्य करता है बाकी समय ग्रामीणजन जैसे तैसे काट लेते है।

      कृषी अधिकारी एलएस खपेड़ ने बताया कि इस वर्ष लगभग 50 हजार हैक्टेयर में बोवनी की संभावना है, किसान बीजों की खरीदी में लगे है। किसान खरीदी के समय व्यापारियों से पक्के बील प्राप्त करें, जिससे की फसल अंकुरित नहीं होने पर संबंधित व्यापारी पर कार्यवाहीं की जा सकें।



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