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Thursday, June 25, 2020

अवैध स्टोन क्रेशर खदान रामपुरिया खनिज विभाग की मिलीभगत से 10 वर्षों से बिना परमिशन के ही चल रही थी क्रेशर खदान....... सर्वे नंबर 793/ की आड़ में चल रहा था अन्य सर्वे नंबर पर पहाड़ी को खोदने का कार्य...... खनिज विभाग के खिलाफ बड़ा खुलासा।






पेटलावाद से हरिश राठौड़ के साथ दिलीप मालवीय की रिपोर्ट

झाबुआ जिले में अवैध क्रेशर स्टोन खदानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है अवैध स्टोन क्रेशर खदान पर अंकुश लगाने की बजाए झाबुआ खनिज विभाग ने अपने सारे कानूनी मर्यादा को ताक पर रखकर वर्षों से अवैध रूप से संचालित  की जा रही स्टोन क्रेशर खदान मालिकों के आगे चंद हरे लाल नोटों के  टुकड़ों के तले अपनी सारी कानूनी मर्यादा भी अवैध उत्खनन करने वाले लोगों के सामने रख दी है मामला है रामपुरिया क्रेशर खदान का जीसमे वर्ष 25/8/  2010 एचएस मेहता पिता शंकरलाल मेहता निवासी अजमेर राजस्थान हाल मुकाम  रतलाम को स्टोन क्रेशर खदान सर्वे नंबर 793/4 जिसमें रकबा 12.200 मे से 2 हेक्टेयर खदान संचालित करने के लिए आवंटित की गई थी लेकिन 10 वर्षों तक खनिज विभाग  झाबुआ की मिलीभगत से वन विभाग राजस्व विभाग को साथ में रख कर खान  सुरक्षा  मंत्रालय निर्देशक खनिकर्म विभाग के बिना परमिशन के ही पहाड़ी नुमा जमीन को पातालपानी जैसी स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया वही 113 किलोमीटर का स्टेट हाईवे रतलाम झाबुआ मार्ग भी इसके द्वारा बना दिया गया  वही  शासन को चुना लगाते हुए करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी भी इसके द्वारा की गई।


(खनिज इस्पेक्टर कर रहे जांच झुकाव स्टोन क्रेशर मैनेजमेंट के आगे जिला कलेक्टर झाबुआ ने शुरू की थी जांच)

10 वर्षों तक पहाड़ी नुमा जमीन को खोदकर घोलकर के पी जाने वाले स्टोन क्रेशर खदान मैनेजमेंट के आगे जांच के नाम पर शंकर सिंह कनेश खनिज इस्पेक्टर को जिला कलेक्टर महोदय झाबुआ द्वारा जांच के लिए जिला खनिज अधिकारी देविका परमार को नियुक्त किया गया था जिसमें जिला अधिकारी झाबुआ द्वारा  बड़े स्तर की जांच को लेकर के खनिज इस्पेक्टर को जांच सौंपी गई खनिज इस्पेक्टर द्वारा अचानक स्टोन क्रेशर रामपुरिया मैं शिकायतकर्ता को 11:00 बजे का कह कर आए थे लेकिन अचानक श्रीमान 9:00 बजे ही क्रेशर खदान पर विराजमान हो गए मैनेजमेंट प्रभारी के साथ में पंचनामा रिपोर्ट भी तैयार कर ली जबकि शिकायतकर्ता 11:00 बजे के लगभग मौका स्थल पर पहुंचे जब तक कुछ समझ पाते 5 मिनट में ही पहले से बने पंचनामा रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करवा लिए गए जबकि खनिज इस्पेक्टर को पास ही में 100 मीटर से अधिक डीप होल बड़े स्तर पर कर रखा था उस जगह पर जांच अधिकारी द्वारा जाना मुनासिब नहीं समझा एवं पंचनामा में भी इसका उल्लेख नहीं किया गया साथ ही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत स्टोन क्रेशर प्लांट परिसर के चारों तरफ की 15 फीट ऊंची पक्की दीवारें भी नहीं पाई गई एवं  पंचनामा रिपोर्ट में जो पेड़ों का उल्लेख किया गया है वह नाम मात्र के पेड़ क्रेशर खदान के चारों तरफ ना होकर बीच में ही कुछ जगह पर पाए गए कुल मिलाकर अधिकारी का रवैया क्रेशर खदान मालिक को बचाना था


डीप होल की नहीं है परमिशन फिर भी 10 वर्षों में पहाड़ी नुमा जगह को बना दिया पातालपानी

सूचना के अधिकार के अधिनियम की धारा के अंतर्गत पर्याप्त सबूतों के साथ में की गई शिकायत में डीप होल जो ब्लास्टिंग के लिए किया गया है संबंधित क्रेशर खदान क्षेत्र में खान मंत्रालय द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि रामपुरिया क्रेशर खदान जिला झाबुआ के नाम से कोई भी हमारे मंत्रालय से परमिशन  डीप होल ब्लास्टिंग करने के लिए नहीं ली गई है जबकि 10 वर्ष के अंदर भ्रष्ट अधिकारी की मिलीभगत से बड़े स्तर पर पहाड़ी को खोदने का खेल खेला गया जिसे पातालफोड़ खुदाई कहते हैं। इस तरह की खुदाई खान अधिनियम 1952 का खुला उल्लंघन है। अधिनियम कहता है कि खनन उच्चतम बिंदु से निम्नतम बिंदु के 6 मीटर की गहराई तक ही हो सकता है जबकि इसके द्वारा विपुल गहराई 100 मीटर के लगभग है और चौड़ाई 200 मीटर के अंदर है इस तरह खुल्ला खेल खेला गयााा

आगे अगले अंक मैं बताएंगे मुहर्रम मिट्टी के नाम से सर्वे नंबर 794 में खनिज विभाग राजस्व विभाग की क्या भूमिका थी एवं खनिकर्म विभाग एवं खान मंत्रालय खनिज विभाग के मिश्रा ने क्या लिखा था लिखा था और अख्तर अली एसएस मेहता ऑन द रिकॉर्ड किसके नाम से दर्ज है क्रेशर खदान वर्तमान में कौन कर रहा है कार्य शासन की गाइड लाइन के साथ में

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