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Monday, June 8, 2020

संकट की घड़ी में विडि़यों कांफ्रेस उत्तम उपाय..... साहब मिटींग में है, जनता नहीं सुन पाएगी यह शब्द..... तकनिक का सहीं इस्तमाल बचा सकता है समय व पैसा....


पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट

पेटलावद। बुजुर्गो की पुरानी कहावत है कि तकनिक का इस्तमाल यदि सहीं तरिके से किया जाए तो मानव जाति का भला हो सकता है और गलत इस्तमाल से विनाश भी संभव है। यह कहावत पिछले कुछ वर्षो में शासवस्त होती दिखाई दे रहीं है और आधुनिक भारत जो कि तकनिकी क्षेत्र में पुरे विश्व में सबसे आगे निकल चुका है भारत के कदम चंद्रमा और मंगल तक पहुंच चुके है और भारत का जन समुदाय तकनिक का सदुपयोग मानव समुदाय के भले के लिए कर रहा है, एैसे हीं कुछ उदाहरण पिछले दिनों को देखने को मिलें।

पीएम भी कर रहे संवाद....

लगभग 80 दिनों से पुरे विश्व सहित देश में कोरोना का कहर जारी है, 24 मार्च से केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा लॉक डाउन करते हुए  लोगो को सुरक्षित रखने के उपाय कियें जा रहे है और सरकारी कर्मचारीयों के बीच सरकारी योजनाआें और आदेशों तालमेल बिठाने के लिए सबसे अच्छी व्यवस्था के रूप में उभरकर आई है विडि़यों कांस्फ्रेसिंग, देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा संकट की इस घड़ी में लगातार अपने मंत्रियों, अधिकारियों, कर्मचारियों व जनता से संवाद के लिए विडि़यों कांस्फ्रेसिंग का सहारा लिया है और पुरी मॉनिटरिंग ऑनलाईन पर करते हुए पुरे भारत वर्ष पर नजर और कमांड बनायें रखने में सफल हुए है जिसका कुछ हद तक श्रेय विडि़यों कांफ्रेसिंग को भी जाता है।

हो रहीं है बैठके...

प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरणा लेते हुए जहां सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने अधिनस्थ अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से विडि़यों कांस्फ्रेसिंग के माध्यम से संवाद करते हुए स्थिती को जाना और निर्णय लिया वहीं सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के मध्य भी आपसी तालमेल विडि़यों कांस्फ्रेसिंग के जरियें बना रहा। इसी तर्ज पर पिछले कुछ दिनों से भाजपा के विभिन्न पदाधिकारी और संगठन के कार्यकर्ता अपने सहयोगीयों से विडि़यों कास्फ्रेसिंग के माध्यम से बैठक करते नजर आ रहे है। वहीं कांग्रेस भी विडि़यों कांफ्रेस का सहारा लेकर अपने कार्यकर्ताओं और जनता से सीधें संवाद में जुटी है।

आम आदमी की पिढ़ा....

एक आम आदमी को सरकारी कार्यालयों में अपना काम करवाने के लिए कई बार चक्कर लगाने पड़ते है और काम काज के निर्धारित समय में जब आम आदमी अपने कामों के लिए सरकारी ऑफिसों में पहुंचता है और जब उसे पता चलता है कि साहब जिले या तहसील की बैठक में गयें है तब उस आम आदमी पर साहब की मिटींग में होने के चलते काम नहीं होने की पिढ़ा चेहरे से साफ झलकती है और ऐसा कई बार होता है कि आदमी साहब की मिटींग में होने के चलते अपना समय और पैसा दोनो बर्बाद करके बेरंग लोटता है।

समय और पैसे की बचत.....

विडि़यों कांस्फ्रेसिंग की इस व्यवस्था को यदि और निचले स्तर पर लागु किया जाए तो तहसील और जिला स्तरों पर होने वाली प्रतिदिन या हप्ते में एक बार की बैठक में जाने का बहाना लेकर जो अधिकारी व कर्मचारी अपने आफिसों से नदारद मिलते है उनको भी कोई बहाना नहीं मिलेगा और तहसील से जिले तक जाने का समय, गाडि़यों के डिजल का खर्च भी बचने के साथ अधिकारी और कर्मचारी जनता के लिए सुलभ और सहज उपलब्ध हो सकेगे जिससे आम आदमी की तकलिफे कम होगी और काम भी जल्दी निपटेंगे। इसलिए तकनिक के इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने की मांग समय के अनुसार उठ रहीं है।  और तकनिक का सहीं इस्तमाल करते हुए यदि यह व्यवस्था लागु हो जाए तो आम आदमी यह कभी नहीं सुन पायेगा की साहब मिटींग में गयें है।

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